News Wave Desk: चीनी की कीमतों में लगातार होती बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया है. सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आने वाली कच्ची चीनी की बिक्री को लेकर नई समयसीमा तय कर दी है. अब आयतकों को तय तारीख का इंतजार करने की जगह हर खेप के लिए निर्धारित अवधि के भीतर चीनी को रिफाइन कर घरेलू बाजार में उतारना होगा.

हर खेप के लिए होगी दो महीने की समयसीमा
नये नियम के अनुसार, TRQ के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से दो महीने के भीतर रिफाइन करके सफेद चीनी के रूप में घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य होगा. बता दें, इससे पहले आयात की गई कच्ची चीनी को बेचने के लिए 31 अक्टूबर 2026 की एक समान अंतिम समयसीमा तय की गई थी, जिसमें सरकार ने बदलाव करते हुए हर खेप के आयात की तारीख के आधार पर अलग-अलग समयसीमा लागू कर दी है. यह नया बदलाव 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के टैरिफ रेट कोटा इम्पोर्ट से जुड़े प्रावधानों के तहत किया गया है. इस नये बदलाव के पीछे सरकार का उद्देश्य आयातित कच्ची चीनी को लंबे समय तक स्टॉक में रखने की जगह उसे समय पर रिफाइन कर घरेलू बाजारों में उपलब्ध कराना बताया जा रहा है.
एक महीने में 7.52 रुपये किलो महंगी हुई चीनी
सफेद चीनी के कीमतों में आई तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है. उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई. यानी की सिर्फ एक महीने में चीनी के दाम में 7.52 रुपये प्रति किलो, करीब 15.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
उत्पादन में कमी को लेकर सरकार की चिंता
चीनी की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी के पीछे घरेलू उत्पादन से जुड़ी चुनौतियां भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है. केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के मुताबिक, गन्ने की फसल पर अल नीनो जैसी मौसमी परिस्थितियों का असर पड़ा है. इसका प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दुनियाभर में कृषि उत्पादन और खासतौर पर चीनी उत्पादन पर असर देखने को मिला है. सरकार के मुताबिक, देश में हर साल करीब 280 लाख टन चीनी की जरूरत होती है. इसके मुकाबले भारत के पास फिलहाल करीब 20 से 25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है.
कीमतों पर काबू पाने की कोशिश
एक तरफ घरेलू बाजार में चीनी के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार आयातित कच्ची चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और उसके समय पर घरेलू बाजार में आने पर जोर दे रही है. ऐसे में TRQ नियमों में बदलाव को कीमतों पर दबाव कम करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है. आने वाले दिनों में घरेलू उत्पादन, आयातित चीनी की उपलब्धता और बाजार में मांग के बीच संतुलन यह तय करेगा कि चीनी की कीमतों में जारी तेजी पर कितनी जल्दी लगाम लगती है.
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