Saraikela: सरायकेला खरसावां जिले की खट्टी इमली ग्रामीणों के लिए वरदान बन गई है. इस साल पैदावार पिछले साल से बेहतर है. कुचाई समेत हर गांव में इमली के पेड़ों से ग्रामीण चुनकर हाट-बाजार में इसे बेच रहे हैं. फरवरी से मई तक कारोबार चरम पर है. जिले में इमली का सालाना लगभग 2 से 2.5 हजार मीट्रिक टन उत्पादन होता है. खुले बाजार में यह ₹43-46/किलो बिक रहा. दक्षिण भारत में कम पैदावार से सरायकेला की इमली की मांग बढ़ी है. आंध्र, तेलंगाना, तमिलनाडु भेजी जाती है. चार महीने का रोजगार देने वाली यह वनोत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी बन चुकी है.

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