रांची : झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस एम सोनक एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य में बर्न वार्ड फैसिलिटी से संबंधित जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की ओर से दायर जवाब पर संतोष जताते हुए या चिकन निष्पादित कर दी. गुरुवार को अदालत में राज्य सरकार ने बताया कि साल 2014 में मिले अनुदान के अनुसार सभी जिलों के सदर अस्पतालों में बर्न यूनिट एवं चिकित्सकों की उपलब्धता तय की गई है, राज्य सरकार संबंधित मरीजों के बेहतर इलाज के लिए अग्रसर है सरकार के द्वारा दया जवाब के आधार पर अदालत में याचिका निष्पादित कर दी. दरअसल एमजीएम अस्पताल में साल 2021 के फरवरी में एक महिला जली हुई हालत में लाई गई थी, लेकिन उसका इलाज समय पर नहीं हुआ और उसकी मौत हो गई. इस संबंध में अधिवक्ता अनूप अग्रवाल ने हाई कोर्ट को पत्र लिखा था, पत्र में कहा गया था कि महिला 14 फरवरी 2021 को अस्पताल में भर्ती हुई थी और 17 फरवरी 2021 से इलाज शुरू हुआ था लेकिन 18 फरवरी 2021 को उसकी मौत हो गई पूर्व में इस मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने झालसा से मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा था. झालसा ने अपनी रिपोर्ट में लापरवाही बरतने की बात कही थी, अदालत अधिवक्ता अनूप कुमार अग्रवाल के पत्र को जनहित याचिका में तब्दील कर सुनवाई कर रही थी.सरकार की ओर से बताया गया था कि एमजीएम के बर्न वार्ड में 20 बेड हैं जिस दिन महिला को अस्पताल लाया गया, उस दिन बर्न के 24 केस थे बेड खाली नहीं रहने के कारण उसे तत्काल बर्न वार्ड में भर्ती नहीं कराया जा सका था. दरअसल, जमशेदपुर के आदित्यपुर की रहने वाली एक महिला को उसके पति ने आग लगाकर जला दिया और फरार हो गया, कुछ लोगों ने उसे एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया अस्पताल ने सिर्फ एक बेड देकर इलाज की खानापूर्ति कर दी थी, 90 फीसदी से अधिक जली इस महिला को बर्न वार्ड में भर्ती नहीं किया गया इस कारण महिला की मौत हो गई, अदालत महिला के मौत मामले में भी स्वत: संज्ञान लिया था.

