रांची: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा के साथ ही पड़ोसी राज्य झारखंड की सीमा पर हलचल बढ़ गई है. इस बार फोकस सिर्फ अवैध शराब और नकदी पर नहीं, बल्कि चुनावी हिंसा में इस्तेमाल होने वाली मसल पावर को रोकने पर भी है. इसी को ध्यान में रखते हुए झारखंड ने बंगाल से सटे अपने 10 जिलों में 52 हाई-टेक चेकपोस्ट बनाए गए हैं, जहां 24 घंटे हर मूवमेंट की स्कैनिंग हो रही है.
सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट मोड
बंगाल सरकार के अनुरोध और चुनाव आयोग के निर्देश के बाद झारखंड प्रशासन ने सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट मोड लागू कर दिया है. साहिबगंज से लेकर पूर्वी सिंहभूम तक फैली लंबी सीमा अब एक तरह से रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है. दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में साफ कर दिया गया है कि बिना सघन जांच के कोई भी वाहन सीमा पार नहीं करेगा. इस बार रणनीति का सबसे अहम पहलू यह है कि चुनावी गड़बड़ी के पारंपरिक रास्तों, जैसे शराब और कैश के साथ-साथ उन लोगों पर भी नजर रखी जा रही है, जो चुनाव के दौरान बाहुबल के रूप में इस्तेमाल होते हैं.
कुछ कुख्यात अपराधी हो सकते हैं सक्रिय
खुफिया एजेंसियों के इनपुट के मुताबिक, झारखंड के कुछ कुख्यात अपराधी पश्चिम बंगाल के संवेदनशील जिलों पुरुलिया, पश्चिम वर्धमान और वीरभूम में सक्रिय हो सकते हैं. इसे रोकने के लिए मतदान से 48 घंटे पहले सभी 52 चेकपोस्टों को फुल सील मोड में डालने की तैयारी है. शराब तस्करी को लेकर भी इस बार खास सतर्कता बरती जा रही है. चुनाव के दौरान बंगाल में लागू होने वाले 48 घंटे के ड्राई डे का फायदा उठाकर झारखंड से शराब की सप्लाई की आशंका रहती है. यही वजह है कि धनबाद का मैथन, बोकारो का चास और जामताड़ा के बॉर्डर इलाके को ‘हॉटस्पॉट’ चिह्नित किया गया है. यहां फ्लाइंग स्क्वॉड और स्टैटिक सर्विलांस टीम लगातार निगरानी कर रही हैं, खासकर ग्रामीण रास्तों और नदी मार्गों पर.
यह भी पढ़ें: धनबाद: बीसीसीएल के ब्लॉक-4 में भीषण भू-धंसान, एक ही परिवार के तीन लोगों के जमींदोज होने खबर
