NEWS DESK: पहाड़ों से प्यार करने वाले अक्सर एडवेंचर की तलाश में निकल पड़ते हैं. कुछ लोग तो ऐसे दीवाने होते हैं कि अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर ट्रैकिंग का सपना पूरा करते हैं. और जब बात ट्रैकिंग की हो, तो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी Mount Everest का नाम अपने आप सामने आ जाता है. पहाड़ों से प्रेम करने वाले लोगों का सपना होता है—एक बार माउंट एवरेस्ट को करीब से देखना या उसे फतह करना.लेकिन इसी सपने की आड़ में एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे हिमालयी पर्यटन उद्योग को हिला कर रख दिया है.
जीवनरक्षक सिस्टम बना धोखाधड़ी का जरिया
नेपाल के पर्वतीय इलाकों में “हेलीकॉप्टर रेस्क्यू” को अब तक जीवन बचाने का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता रहा है. मगर इसी व्यवस्था का दुरुपयोग कर एक बड़े बीमा घोटाले को अंजाम दिया गया. इस पूरे नेटवर्क का खुलासा Nepal Police Central Investigation Bureau ने किया है.
कैसे गाइड, कंपनियां और अस्पताल बने गैंग
जांच में सामने आया है कि ट्रैकिंग गाइड, हेलीकॉप्टर कंपनियां और अस्पतालों के कुछ कर्मचारी मिलकर पर्यटकों को जानबूझकर बीमार बनाते थे. इसके लिए उनके खाने में बेकिंग सोडा मिलाया जाता था, जिससे पेट संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाती थीं. इन लक्षणों को ऊंचाई पर होने वाली बीमारी यानी एल्टीट्यूड सिकनेस जैसा दिखाया जाता था, ताकि पर्यटकों को डराकर महंगे हेलीकॉप्टर रेस्क्यू के लिए मजबूर किया जा सके.
फर्जी रेस्क्यू के नाम पर करोड़ों की वसूली
कुछ मामलों में पर्यटकों को “डायमॉक्स” जैसी दवाएं अधिक मात्रा में दी जाती थीं, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ जाती थी. इसके बाद उन्हें तत्काल एयरलिफ्ट की सलाह दी जाती थी, जिसे जीवन बचाने का एकमात्र विकल्प बताया जाता था.जांच एजेंसियों के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच 300 से अधिक फर्जी रेस्क्यू के मामले सामने आए हैं. इस घोटाले में कई हेलीकॉप्टर कंपनियों के नाम सामने आए हैं, जिनमें Mountain Helicopters, Manang Air और Altitude Air शामिल हैं. इसके अलावा कुछ अस्पतालों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.
आंकड़ों के मुताबिक, एक कंपनी ने 1,248 रेस्क्यू में से 171 मामलों को फर्जी दिखाकर एक करोड़ डॉलर से अधिक की वसूली की, जबकि दूसरी कंपनी ने 471 में से 75 मामलों में धोखाधड़ी कर लगभग 80 लाख डॉलर का दावा किया. एक अस्पताल को ही इस अवधि में 1.58 करोड़ डॉलर से अधिक का भुगतान मिला.
बड़ी हेलीकॉप्टर कंपनियां और अस्पताल घेरे में
इस मामले में अब तक 32 लोगों पर आरोप तय किए गए हैं, जिनमें से 9 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य फरार हैं. अभियोजन पक्ष ने आरोपियों पर भारी जुर्माना लगाने की मांग की है.
गौरतलब है कि इस तरह की धोखाधड़ी पहली बार 2018 में सामने आई थी, लेकिन समय के साथ यह और अधिक संगठित रूप लेती गई. 12 मार्च 2026 को दायर चार्जशीट के बाद इस मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है.
यह मामला न केवल एक बड़े आर्थिक घोटाले को उजागर करता है, बल्कि उन हजारों पर्वतारोहियों के भरोसे पर भी सवाल खड़े करता है, जो हर साल Mount Everest की ओर अपने सपनों को साकार करने निकलते हैं.
