गुमला में स्ट्रॉबेरी खेती से बदल रही किसानों की तस्वीर, पलायन पर लग सकता है लगाम

गुमला: झारखंड के कई इलाकों में किसान धान की खेती के बाद रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने...

गुमला: झारखंड के कई इलाकों में किसान धान की खेती के बाद रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं, जहां उन्हें मजदूरी करते हुए कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. यह मुद्दा अक्सर राजनीतिक चर्चा का विषय बनता है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल कम ही देखने को मिलती है.

जिला प्रशासन की पहल

हालांकि, गुमला जिले में इस दिशा में गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं. जिला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद संसाधनों का बेहतर उपयोग कर किसानों की आय बढ़ाने पर काम किया जा रहा है.

जमीन और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर

डीसी प्रेरणा दीक्षित का मानना है कि यदि उपलब्ध जमीन का सही तरीके से उपयोग किया जाए, तो किसान आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं. उन्होंने बताया कि जिले के कई इलाकों में पर्याप्त जल उपलब्धता के बावजूद खेती नहीं हो पा रही है, ऐसे क्षेत्रों में किसानों को खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि गुमला में स्ट्रॉबेरी की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है, जो किसानों के लिए आय का बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है. जिला उद्यान विभाग किसानों को इसके लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है, जिससे वे आसानी से स्ट्रॉबेरी की खेती कर सकें.

स्ट्रॉबेरी खेती बन रही आय का नया स्रोत

स्ट्रॉबेरी उत्पादों के लिए स्थानीय स्तर पर बाजार भी उपलब्ध है. साथ ही, यदि किसान चाहें तो जिला प्रशासन उनके उत्पादों की मार्केटिंग में भी सहयोग कर रहा है.

मिट्टी की गुणवत्ता और सकारात्मक परिणाम

जिला उद्यान विभाग के तकनीकी पदाधिकारी दीपक कुमार सिंह के अनुसार, गुमला की मिट्टी स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए काफी उपयुक्त है. इसी कारण किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित किया जा रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं.

किसान की सफलता की कहानी

गुमला के किसान संदीप साहू ने बताया कि पहले वे रोजगार के लिए भटकते थे, लेकिन अब स्ट्रॉबेरी की खेती से न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि उन्होंने गांव की महिलाओं को भी रोजगार उपलब्ध कराया है.

डीसी प्रेरणा दीक्षित ने कहा कि यदि किसान अपनी जमीन का शत-प्रतिशत उपयोग करें, तो क्षेत्र में हरित क्रांति लाई जा सकती है. उन्होंने बताया कि कृषि विभाग द्वारा किसानों को हर संभव सुविधा दी जा रही है, वहीं जल संसाधनों के लिए तालाबों का भी निर्माण कराया गया है, जिससे सिंचाई में सुविधा मिल रही है.

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि ग्रामीणों को उनके अपने क्षेत्र में ही रोजगार के बेहतर अवसर मिलें, ताकि पलायन रुके और किसान आत्मनिर्भर बन सकें.

आने वाले समय में स्ट्रॉबेरी की खेती गुमला के किसानों के लिए एक बड़ा अवसर साबित हो सकती है, जो उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती है.

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