हजारीबाग: हजारीबाग जिले के चर्चित विष्णुगढ़ (कुसुम्बा) हत्याकांड मामले ने अब एक नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है. कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने हजारीबाग पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और जांच के तरीकों पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे झारखंड पुलिस की साहित्यिक रचना करार दिया है. उन्होंने एसआईटी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है.
सूचक ही अभियुक्त, एफआईआर पर उठाए सवाल:
अंबा प्रसाद ने पुलिस द्वारा जारी एक अप्रैल की प्रेस विज्ञप्ति का पोस्टमार्टम करते हुए पूछा कि जब मृतका की मां रेशमी देवी ही इस कांड की सूचक (शिकायतकर्ता) थीं, तो वह रातों-रात हत्यारिन कैसे बन गईं. उन्होंने सवाल किया, क्या एफआईआर के लिखित आवेदन को बदल दिया गया है? अगर सूचक ही अभियुक्त बन गई है, तो कोर्ट में केस कौन साबित करेगा? इसका सीधा लाभ आरोपियों को मिलेगा.
धनेश्वर पासवान और भाजपा कनेक्शन का जिक्र:
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि पुलिस ने शुरुआती संदिग्ध धनेश्वर पासवान को लेकर रहस्य बनाए रखा है. उन्होंने भीम राम नामक आरोपी को भाजपा का बूथ अध्यक्ष बताते हुए कहा कि वह रामनवमी के जुलूस में पुलिस सुरक्षा के बीच नाच रहा था. उन्होंने तंज कसा, क्या राह चलते कोई किसी को बेटी की हत्या के लिए बुलाता है और वह तुरंत तैयार हो जाता है? यह वाहियात कहानी कोई भी समझदार व्यक्ति स्वीकार नहीं करेगा.
प्रीमेच्योर बलि और पंचांग की गलती:
अंबा प्रसाद ने पुलिस की थ्योरी में ‘बलि’ के एंगल पर तकनीकी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पुलिस के अनुसार अष्टमी के दिन बलि दी जानी थी, लेकिन पंचांग के अनुसार हत्या की रात (24-25 मार्च) सप्तमी थी. उन्होंने पुलिस पर कटाक्ष करते हुए कहा, पत्रा के हिसाब से तो यह प्रीमेच्योर बलि हो गई. कहानी लिखने से पहले कम से कम पंचांग तो देख लेना चाहिए था.
साक्ष्यों से छेड़छाड़ और साइंटिफिक जांच का अभाव:
पुलिस जांच की खामियों को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि नौ दिनों तक घटनास्थल को खुला छोड़ दिया गया, जिससे सबूत नष्ट होने की पूरी आशंका है. स्थानीय पुलिस ने पहले कहा था कि प्राइवेट पार्ट के साथ छेड़छाड़ नहीं हुई, लेकिन बाद में स्टिक (लाठी) डालने की बात कही गई. अंबा प्रसाद ने पूछा कि वह स्टिक कहां है और क्या डीएनए टेस्ट कराया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि पॉक्सो जांच की गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाई गई हैं.
सुरक्षा के नाम पर घेराबंदी:
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि मृतका के परिवार को दी गई पुलिस सुरक्षा असल में उन्हें नजरबंद करने की कोशिश है. उन्होंने कहा, परिवार को घेराबंदी में इसलिए रखा गया है ताकि वे मीडिया या राजनीतिक दलों से बात न कर सकें और पुलिस की रची हुई कहानी की सच्चाई सामने न आ जाए.



