रांची: झारखंड की सियासत में इन दिनों नदियों की रेत और पहाड़ों के पत्थरों ने सियासी उबाल का केंद्र बन गए हैं. गोड्डा जिले में फल-फूल रहे अवैध खनन के काले साम्राज्य ने अब सत्ताधारी गठबंधन के भीतर ही असंतोष की चिंगारी सुलगा दी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली सरकार में शामिल राजद ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है. राजद ने सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिले में वर्षों से जारी इस लूट की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. यह केवल राजस्व का नुकसान नहीं है, बल्कि सूखती नदियों और गिरते जलस्तर के साथ पर्यावरण के खिलाफ एक बड़ी साजिश के रूप में उभर रहा है.
जांच से खुलेगा सिंडिकेट का राज
धनंजय यादव ने स्पष्ट किया कि गोड्डा के विधायक और मंत्री कई बार मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को इस स्थिति से अवगत करा चुके हैं. अब मांग उठ रही है कि इस काली कमाई का हिस्सा किन-किन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की जेबों तक जा रहा है, इसका पर्दाफाश केवल एक उच्चस्तरीय जांच से ही संभव है.
राजद के प्रदेश महासचिव धनंजय यादव ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में क्या लिखा है
गोड्डा के सभी प्रखंडों में बालू, पत्थर और गिट्टी का अवैध उत्खनन इस कदर हावी है कि जिले की नदियां रेत विहीन हो चुकी हैं, जिससे जलस्तर रसातल में चला गया है.
कढिया, हरना, त्रिवेणी और निलझी जैसी नदियां अब अस्तित्व खो चुकी हैं, जिससे किसान सिंचाई के लिए तरस रहे हैं.
केवल सनातन घाट से ही प्रतिदिन लगभग 27.75 लाख रुपये की अवैध उगाही का अनुमान है. यदि पूरे जिले की सीमाओं—मिर्जा चौकी से बिहार रोड तक—की जांच की जाए, तो यह आंकड़ा करोड़ों में पहुँच जाएगा.
सत्ता के गलियारों में विद्रोह के सुर
संजय प्रसाद यादव (राजद मंत्री): शुक्रवार को उन्होंने इस अवैध कारोबार पर कड़े सवाल उठाए.
प्रदीप यादव (कांग्रेस विधायक दल नेता): सनातन घाट से प्रतिदिन 150 हाईवा बालू के अवैध उठाव को लेकर वे पहले ही तीखी प्रतिक्रिया दे चुके हैं.
के. राजू (कांग्रेस प्रभारी): जिलों में हो रहे अवैध खनन के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं.
अंबा प्रसाद (पूर्व विधायक): हजारीबाग में पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के खिलाफ लगातार जमीन पर संघर्ष कर रही हैं.
