फलों का राजा या जहर का स्वाद? बढ़ती मांग के बीच आम पर गहराता केमिकल खतरा

      Lifestyle Desk: गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और फलों की दुकानों पर सबसे...

 

 

 

Lifestyle Desk: गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और फलों की दुकानों पर सबसे ज्यादा भीड़ जिस फल के लिए उमड़ती है, वह है–आम. ‘फलों का राजा’ कहलाने वाला आम सिर्फ स्वाद का ही नहीं, बल्कि भावनाओं का भी हिस्सा है. बचपन की यादों से लेकर पारिवारिक दावतों तक, आम हर जगह अपनी खास जगह बनाता है. लेकिन इस मीठे फल के पीछे अब एक कड़वी सच्चाई भी तेजी से सामने आ रही है.

देश के कई हिस्सों में, खासकर बड़े शहरों में, बाजार की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आम को प्राकृतिक तरीके से पकाने के बजाय खतरनाक रसायनों का सहारा लिया जा रहा है. हाल ही में हैदराबाद में हुई एक कार्रवाई ने इस सच्चाई को उजागर कर दिया, जहां पुलिस ने करीब 200 किलो केमिकल से पकाए गए आम जब्त किए. यह घटना सिर्फ एक शहर की नहीं, बल्कि पूरे देश में फैलती एक चिंताजनक प्रवृत्ति का संकेत है.

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मुनाफे की अंधी दौड़ और नियमों की अनदेखी

तेजी से मुनाफा कमाने की चाह में कुछ व्यापारी खाद्य सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी कर रहे हैं. नियमों के अनुसार, 20 किलो आम की एक पेटी में एथिलीन गैस के अधिकतम 5 पैकेट का ही इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन ज्यादा मुनाफे के लालच में कई व्यापारी इस सीमा को पार कर रहे हैं.

सबसे गंभीर बात यह है कि कई जगहों पर कार्बाइड और एसिटिलीन जैसी प्रतिबंधित गैसों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. ये रसायन न सिर्फ गैरकानूनी हैं, बल्कि मानव शरीर के लिए बेहद हानिकारक भी साबित हो सकते हैं. इनका असर धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है और लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है.

एथिलीन गैस: सुरक्षित विकल्प या भ्रम?

एथिलीन एक प्राकृतिक हार्मोन है जो फलों के भीतर खुद बनता है और उन्हें धीरे-धीरे पकाता है. इसी वजह से नियंत्रित मात्रा में इसका उपयोग सुरक्षित माना जाता है. फूड सेफ्टी नियमों के अनुसार, इसकी मात्रा 100 ppm से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

हालांकि, समस्या तब शुरू होती है जब एथिलीन का उपयोग भी गलत तरीके से किया जाता है. कई बार इसे सीधे फलों के संपर्क में ला दिया जाता है या जरूरत से ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे फल की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों प्रभावित होती हैं.

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सेहत पर पड़ता है सीधा असर

केमिकल से पकाए गए आम सिर्फ स्वाद को ही नहीं बिगाड़ते, बल्कि सेहत के लिए भी खतरा बन सकते हैं. ऐसे आम खाने से सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, पेट में गड़बड़ी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसे फलों का सेवन शरीर के लिए और भी गंभीर परिणाम ला सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों के लिए यह खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है. इसलिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है.

घर पर ऐसे करें असली आम की पहचान

बाजार से आम खरीदते समय कुछ आसान तरीकों को अपनाकर आप अपनी सेहत को सुरक्षित रख सकते हैं.

पानी का परीक्षण:

एक बाल्टी पानी में आम डालें. अगर आम डूब जाता है, तो वह प्राकृतिक रूप से पका हुआ है. अगर वह तैरता है, तो उसमें केमिकल का इस्तेमाल होने की संभावना है.

रंग और बनावट पर ध्यान दें:

प्राकृतिक आम का रंग एक जैसा नहीं होता–उसमें हल्के-गहरे शेड्स होते हैं. वहीं, केमिकल से पके आम पूरी तरह से एक जैसे पीले या नारंगी दिखते हैं और उन पर असामान्य चमक होती है.

खुशबू और स्पर्श:

असली आम की खुशबू मीठी और प्राकृतिक होती है. अगर आम से अजीब या केमिकल जैसी गंध आए, तो सावधान हो जाएं. साथ ही, ज्यादा मुलायम या पिलपिला आम भी शक के दायरे में आता है.

स्वाद का फर्क:

प्राकृतिक आम का स्वाद गहरा और संतुलित होता है, जबकि केमिकल वाला आम अक्सर फीका या अजीब स्वाद वाला होता है.

बेकिंग सोडा परीक्षण:

पानी में थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाकर आम को 15–20 मिनट तक रखें. अगर छिलके का रंग बदलता है, तो यह केमिकल ट्रीटमेंट का संकेत हो सकता है.

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जागरूकता ही है सबसे बड़ा बचाव

आज के समय में, जब हर चीज तेजी और मुनाफे के इर्द-गिर्द घूम रही है, तब उपभोक्ताओं की जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार बन सकती है. आम खरीदते समय थोड़ी सावधानी और जानकारी आपको बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है.

आखिरकार, आम का असली आनंद तभी है जब उसकी मिठास के साथ भरोसा भी जुड़ा हो. इसलिए इस गर्मी, सिर्फ स्वाद नहीं, सुरक्षा को भी अपनी प्राथमिकता बनाएं.

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