रांची: जिला प्रशासन की ओर से स्कूल फीस समिति की एक अहम बैठक उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आयोजित की गई. बैठक में निजी और सरकारी स्कूलों की फीस, पाठ्यपुस्तकों के चयन और बच्चों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.
पाठ्यपुस्तकों के चयन पर स्पष्ट निर्देश
बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि सभी विद्यालय अपने पाठ्यक्रम के लिए एनसीईआरटी और एससीईआरटी की पुस्तकों को प्राथमिकता देंगे. इसका उद्देश्य शिक्षा को अधिक मानकीकृत और सुलभ बनाना है.
बच्चों के समग्र विकास पर जोर
शुरुआती कक्षाओं में खेल-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही गई. जरूरत के अनुसार सहायक पुस्तकों के उपयोग की भी अनुमति दी गई, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके.
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री-एडमिशन शुल्क पर सख्ती
बैठक में स्कूलों द्वारा री-एडमिशन के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने के मामले पर गंभीर चर्चा हुई. उपायुक्त ने इस पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि इस तरह की अवैध वसूली बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई होगी.
बाल अधिकारों के पालन का निर्देश
चाइल्ड राइट वायलेशन के मामलों को लेकर भी प्रशासन सख्त नजर आया. सभी स्कूल प्रबंधन को नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया. उपायुक्त ने कहा कि बच्चों के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.
बैठक में ये रहे मौजूद
इस बैठक में जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई), जिला समिति के सदस्य और विभिन्न स्कूलों के प्राचार्य उपस्थित रहे.
बैठक के बाद डीसी का बयान
डीसी मंजूनाथ भजन्त्री का बयान:
“जिला स्तरीय शुल्क समिति की बैठक में निजी स्कूलों द्वारा फीस, री-एडमिशन, यूनिफॉर्म, किताबों और बस शुल्क में अचानक वृद्धि से जुड़ी शिकायतों पर गंभीरता से चर्चा की गई है. कई मामलों में अभिभावकों को एक ही स्थान से किताबें खरीदने के लिए बाध्य करने की बात भी सामने आई है, जो उचित नहीं है.
सभी स्कूलों से पिछले तीन वर्षों का कक्षावार और श्रेणीवार फीस विवरण मांगा गया है, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके. अगले सप्ताह सभी स्कूल प्रबंधन के साथ बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे कि आरटीई और एनसीईआरटी के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए.
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यदि जांच में कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ जुर्माना सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर आरटीई के तहत मान्यता वापस लेने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी.”
