गिरिडीह: 20 वर्षों से अवैध पत्थर खनन का काला साम्राज्य, हादसे के बाद भी धड़ल्ले से जारी कारोबार

Giridih: जिले के धनवार प्रखंड के कैलाढाब पंचायत अंतर्गत पदनाटांड क्षेत्र में पिछले करीब 20 वर्षों से अवैध पत्थर खनन का बड़ा...

Giridih: जिले के धनवार प्रखंड के कैलाढाब पंचायत अंतर्गत पदनाटांड क्षेत्र में पिछले करीब 20 वर्षों से अवैध पत्थर खनन का बड़ा खेल जारी है. यहां दो अवैध खदानों का संचालन महेंद्र मोदी और शैलेश वर्मा द्वारा किए जाने का आरोप है.

प्रतिदिन हाइवा से पत्थर की ढुलाई

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, दोनों खदानों से प्रतिदिन लगभग 30-30 हाइवा पत्थर का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है. दिन में पानी छिड़काव और शाम होते ही बड़े पैमाने पर पत्थरों की ढुलाई शुरू कर दी जाती है, ताकि प्रशासन की नजरों से बचा जा सके.

हादसे के बाद भी जारी खनन

करीब तीन महीने पहले एक खदान में ड्रिलिंग के दौरान एक मजदूर की मौत हो गई थी. कुछ दिनों तक काम बंद रहा, लेकिन इसके बाद फिर से अवैध खनन तेजी से शुरू हो गया.

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कानूनों की खुलेआम अनदेखी

इस पूरे मामले में कई कानूनों का उल्लंघन सामने आ रहा है. बिना वैध लीज के खनन, बिना लाइसेंस परिवहन, ई-ट्रांजिट पास के बिना ढुलाई और पर्यावरणीय स्वीकृति के बिना संचालन जैसे गंभीर आरोप लगे हैं.

वन क्षेत्र के पास खनन से खतरा

बताया जाता है कि दोनों खदानें वन भूमि से महज 10 मीटर की दूरी पर स्थित हैं. बावजूद इसके यहां लगातार ब्लास्टिंग और खनन जारी है, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है.

ग्रामीणों में दहशत का माहौल

ब्लास्टिंग के कारण आसपास के घरों में दरारें पड़ने लगी हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वे खनन माफियाओं के डर से खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं.

सफेदपोश संरक्षण के आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि खदान संचालकों को प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है.

प्रशासन पर उठे सवाल

इतने लंबे समय से अवैध खनन के बावजूद कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े करता है. अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब सख्त कदम उठाता है.

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