झारखंड की बेटियों के सपनों को हेमंत सरकार के पंख, नेतरहाट विद्यालय में अब छात्राओं को भी मिलेगा प्रवेश, 33 फीसदी सीटें आरक्षित

Ranchi: झारखंड का गौरव कहे जाने वाले नेतरहाट आवासीय विद्यालय के 70 साल के इतिहास में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बड़ा...

Ranchi: झारखंड का गौरव कहे जाने वाले नेतरहाट आवासीय विद्यालय के 70 साल के इतिहास में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक बड़ा क्रांतिकारी बदलाव कर दिया है. राज्य सरकार ने नेतरहाट आवासीय विद्यालय प्रबंधन और संचालन नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के साथ ही अब नेतरहाट की पहाड़ियों पर न केवल बेटों, बल्कि राज्य की मेधावी बेटियों की सफलता की गूंज भी सुनाई देगी. शैक्षणिक सत्र 2025-26 की नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए यह नई व्यवस्था और छात्राओं का प्रवेश सत्र 2026-27 से प्रभावी होगा.

बेटियों के लिए 33% आरक्षण

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की मेधावी छात्राओं को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों की राह आसान बनाने के लिए नेतरहाट विद्यालय में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया है. दशकों से यह विद्यालय केवल छात्रों के लिए सीमित था, लेकिन अब नई नियमावली के तहत बेटियों को भी समान भागीदारी मिलेगी. सीएम सोरेन का यह कदम राज्य में महिला सशक्तिकरण और समान शिक्षा के संकल्प को धरातल पर उतारने वाला माना जा रहा है.

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सीटों में ट्रिपल जंप

• 3 साल में दोगुनी: अगले तीन वर्षों के भीतर विद्यालय की मौजूदा सीटों को दोगुना किया जाएगा.
• 5 साल में तिगुनी: पांच वर्षों के भीतर सीटों की संख्या को वर्तमान से तीन गुना कर दिया जाएगा.
• ऐतिहासिक संदर्भ: इससे पहले अंतिम बार सीटों में वृद्धि वर्ष 1982 में की गई थी. यानी 42 वर्षों के बाद हेमंत सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाया है.

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जैक संभालेगा कमान, पारदर्शी होगी चयन प्रक्रिया

प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की विसंगति को दूर करने और पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए अब परीक्षा की जिम्मेदारी झारखंड एकेडमिक काउंसिल को सौंपी गई है.

• परीक्षा का स्वरूप: सत्र 2026-27 से जैक दो चरणों (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा) में टेस्ट लेगा.
पैटर्न: सभी प्रश्न वस्तुनिष्ठ होंगे.
• कमेटी: सिलेबस तय करने के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया गया है.

चार स्तरीय प्रबंधन: पूर्व छात्रों को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी

• एपेक्स बॉडी: मुख्यमंत्री स्वयं इसकी अध्यक्षता करेंगे और सर्वोच्च नीतिगत निर्णय लेंगे.
• सामान्य निकाय: शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में संचालित होगा.
• कार्यकारिणी समिति: इसकी कमान विद्यालय के किसी ऐसे पूर्व छात्र के हाथ में होगी जिनके पास 10 वर्ष का अनुभव हो. इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे जाएंगे.
• विद्यालय प्रबंध समिति: दैनिक संचालन के लिए प्राचार्य की अध्यक्षता में यह समिति कार्य करेगी.

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