Lohardaga: सुंदरी देवी सरस्वती शिशु मंदिर, लोहरदगा के प्रांगण में शनिवार को शिशु वाटिका (अरुण, उदय एवं प्रभात वर्ग) के बच्चों के सर्वांगीण विकास को केंद्र में रखते हुए ‘अभिभावक गोष्ठी’ का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को आधुनिक एवं व्यवहारिक शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराना तथा बच्चों के मानसिक, शारीरिक और नैतिक विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था. कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना के साथ हुई, जिसके बाद विद्यालय के आचार्यों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षण की नई और रोचक विधियों का प्रदर्शन किया. आचार्यों ने बताया कि किस प्रकार घर में उपलब्ध साधारण वस्तुओं के जरिए भी बच्चों को प्रभावी ढंग से शिक्षा दी जा सकती है. ‘मोतियों का जादू’ गतिविधि के तहत रंग-बिरंगे मोतियों के माध्यम से बच्चों को गिनती, रंगों की पहचान और एकाग्रता विकसित करने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की शिक्षा देने के तरीके प्रस्तुत किए गए.
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“बच्चों पर अनावश्यक पढ़ाई का दबाव ना डालें”
इसके अलावा बालू, चावल और अबीर जैसी सामान्य सामग्रियों का उपयोग कर बच्चों के स्किल्स को विकसित करने तथा अक्षर और आकृतियां सिखाने का जीवंत प्रदर्शन किया गया. अभिभावकों को यह समझाया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि दैनिक जीवन की छोटी-छोटी चीजों से भी बच्चों के भीतर सीखने की जिज्ञासा जगाई जा सकती है. गोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शिशु अवस्था से लेकर प्रभात वर्ग तक की आयु बच्चों के सीखने का स्वर्णिम काल होता है. इस दौरान यदि बच्चों को सही दिशा, संस्कार और सकारात्मक वातावरण मिले तो उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सकता है. अभिभावकों को सलाह दी गई कि वे बच्चों पर अनावश्यक पढ़ाई का दबाव न डालें, बल्कि खेल-खेल में सीखने की प्रक्रिया को अपनाएं, जिससे बच्चे तनावमुक्त रहकर सहज रूप से ज्ञान अर्जित कर सकें.
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जल-क्रीड़ा का बच्चों ने लिया आनंद
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण स्विमिंग पूल गतिविधि रही, जिसमें नन्हे-मुन्ने बच्चों ने जल-क्रीड़ा का आनंद लेते हुए उत्साह और उमंग का परिचय दिया. इस दौरान बच्चों की खुशी और ऊर्जा को देखकर अभिभावक भी बेहद प्रसन्न नजर आए. विद्यालय की आधुनिक सुविधाओं और शिक्षण के नवाचारों की अभिभावकों ने सराहना की. कार्यक्रम के अंत में वाटिका प्रमुख सुनीता कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि विद्यालय और अभिभावकों के बीच निरंतर संवाद ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है. उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के विकास में विद्यालय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करें.
मौके पर कई शिक्षक रहे मौजूद
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र पांडे, आचार्य रवि रंजन, अशोक सिंह, महेंद्र मिश्रा, दीपिका सिंह, लक्ष्मी जी, श्वेता सोनी, आकांक्षा सिंह, पिंकी जायसवाल सहित बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे. कार्यक्रम ने शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक और सहयोगात्मक वातावरण बनाने का संदेश दिया.
