Bermo : झारखंड के बोकारो जिले के पिंडराजोरा थाना क्षेत्र से पिछले कई महीनों से लापता 18 वर्षीय युवती के मामले में आज पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. पुलिस ने चास कॉलेज के पीछे जमीन में दफनाया गया युवती का शव सड़ी-गली अवस्था में बरामद किया है. इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है. पुलिस ने शक के आधार पर थाना क्षेत्र के ही दिनेश कुमार नामक युवक को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की थी. शुरुआत में पुलिस को छकाने के बाद, गहन पूछताछ में दिनेश टूट गया और उसने युवती की हत्या कर शव दफनाने की बात स्वीकार कर ली. शनिवार को दिनेश की निशानदेही पर ही पुलिस ने निर्दिष्ट स्थान पर खुदाई की तो शव पूरी तरह से गल गया था और वहां सिर्फ नरकंकाल का ढांचा बचा है, जिसे बाहर निकाला जा रहा है.
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मौके पर डीआईजी संध्या रानी मेहता रहीं मौजूद
शव का अवशेष बरामदगी के समय मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो एसपी सहित रांची हाईकोर्ट के निर्देश पर मुख्यालय से आईं डीआईजी संध्या रानी मेहता स्वयं मौजूद रहीं. भारी संख्या में पुलिस बल और अन्य पुलिस पदाधिकारियों की मौजूदगी में शव की हड्डियों के ढांचे को निकाला जा रहा है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार युवक दिनेश और मृतका के बीच प्रेम संबंध थे. बताया जा रहा है कि युवती लगातार दिनेश पर विवाह के लिए दबाव बना रही थी. इसी विवाद से पीछा छुड़ाने के लिए दिनेश ने खौफनाक साजिश रची और युवती की हत्या कर उसके शव को सुनसान इलाके में दफना दिया. बेटी के लापता होने के बाद उसकी मां 21 जुलाई 2025 से लापता बेटी की बरामदगी को लेकर थाना में एफआईआर दर्ज करवाने को लेकर चक्कर काटती रही. परंतु थाना प्रभारी ने मामला दर्ज नहीं किया था. एक पखवारे बाद महिला द्वारा पूर्व में दिए गए आवेदन को बदलकर दूसरा आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
हाईकोर्ट की तल्खी और पुलिस पर गिरी गाज
इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब युवती की मां ने अपनी बेटी की तलाश के लिए झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. हाईकोर्ट ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए बोकारो पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली पर तीखी और तल्ख टिप्पणी की थी. अदालत के कड़े रुख के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था.
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कार्रवाई का असर
लापरवाही बरतने के आरोप में पिंडराजोरा थाना प्रभारी अभिषेक रंजन को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है. मामले की निष्पक्ष जांच के लिए ‘वन मैन कमीशन’ का गठन किया गया है और इसी के तहत संध्या रानी मेहता को बोकारो भेजा गया है.
न्याय की उम्मीद
हाईकोर्ट की निगरानी और सूबे की डीजीपी तदाशा मिश्रा की मॉनेटरिंग में डीआईजी स्तर के अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार सच सामने आ गया है. हालांकि, एक मां की उम्मीदें अपनी बेटी को जीवित देखने की थीं, जो इस दुखद खुलासे के साथ टूट गईं.
