Ranchi: झारखंड राज्य प्रशासनिक सेवा के तीन अफसरों पर गाज गिर गई है. धनबाद, चतरा और गोड्डा में पदस्थापित रहे तीन अधिकारियों के खिलाफ उपायुक्तों द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट और आरोप पत्र के आधार पर अब विभागीय कार्रवाई शुरू कर दिय़ा गया है. कार्मिक ने इसका आदेश जारी कर दिया.
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किस पर क्या है आरोप?
अनिल कुमार यादव: बिना सत्यापन के 2.65 करोड़ का भुगतान
धनबाद नगर निगम के तत्कालीन उप नगर आयुक्त अनिल कुमार यादव पर वित्तीय अनियमितता के गंभीर आरोप हैं. उन्होंने मेंसर्स व्योम टेक्नोलॉजी लिमिटेड द्वारा आपूर्ति की गई सामग्रियों की गुणवत्ता और मात्रा का भौतिक सत्यापन किए बिना ही जल्दबाजी में भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी. इस लापरवाही के कारण सरकारी खजाने को 2,65,04,668.00 का वित्तीय नुकसान पहुंचा है. इसे सरकारी राशि का दुरुपयोग मानते हुए सरकार ने कार्रवाई की अनुशंसा की है.
लियाकत अली: जमीन घोटाले और अवैध जमाबंदी का मामला
टंडवा (चतरा) के तत्कालीन अंचल अधिकारी लियाकत अली पर भू-माफियाओं और निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप है. उपायुक्त चतरा की रिपोर्ट के अनुसार, लियाकत अली ने अभिजीत इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पक्ष में गलत तरीके से जमाबंदी की. इसके अलावा, उन पर बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि की अवैध जमाबंदी करने के कुल 5 गंभीर आरोप प्रतिवेदित हैं. भूमि जैसे संवेदनशील मामले में भ्रष्टाचार पाए जाने पर सरकार ने उनके विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश दिए हैं.
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राजीव कुमार मिश्रा : सरकारी संसाधनों का निजी उपयोग और गबन
नगर पंचायत महागामा (गोड्डा) के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी राजीव कुमार मिश्रा पर पद की गरिमा के विरुद्ध कार्य करने के आरोप हैं. बिना अनुमति के नगर पंचायत की जेसीबी मशीन को ग्रामीण क्षेत्रों में निजी उद्देश्यों के लिए चलवाने का आरोप है. साथ ही मशीन का लॉगबुक संधारित नहीं करना और उससे प्राप्त भाड़े की वसूली में भारी हेराफेरी करने ता भी आरोप है. वसूली गई राशि को सरकारी खाते में जमा न करना और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने का भी आरोप लगा है.
