रांची: बोकारो और हजारीबाग के कोषागार (ट्रेजरी) से हुए करोड़ों के वेतन घोटाले मामले में राज्य सरकार सख्त नजर आ रही. इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद अब राज्य के विभिन्न विभाग अत्यधिक सतर्क हो गए हैं. इसी कड़ी में स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा रुख अपनाते हुए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारियों (डीडीओ) के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
18.98 करोड़ का आवंटन और नई शर्तें:
स्वास्थ्य विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष में कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए लगभग 18.98 करोड़ रुपये का आवंटन जारी किया है, हालांकि, यह आवंटन सामान्य नहीं है.इसके साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए कड़े ‘चेक एंड बैलेंस’ लागू किए गए हैं. विभाग ने स्पष्ट किया है कि अब केवल औपचारिकता निभाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि हर निकासी की सत्यता की पुष्टि डीडीओ को व्यक्तिगत स्तर पर करनी होगी.
डीडीओ के लिए जारी मुख्य दिशा-निर्देश:
विभागीय आदेश के अनुसार, अब बिल पास करने की प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए हैं. डीडीओ को बिल पर हस्ताक्षर करने से पहले यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित राशि की निकासी पहले कभी नहीं की गई है.
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यदि भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध या गलत निकासी पाई जाती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी की होगी और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. प्रत्येक बिल पर डीडीओ को यह प्रमाण पत्र देना होगा कि निकासी बजट प्रावधानों और आवंटित राशि की सीमा के भीतर की जा रही है.उन्हें यह भी अंकित करना होगा कि वे इस राशि की निकासी के लिए पूरी तरह सक्षम पदाधिकारी हैं. महालेखाकार (AG) कार्यालय में हिसाब-किताब में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए निर्देश दिया गया है कि बिल पर मुख्य शीर्ष, लघु शीर्ष, उप मुख्य शीर्ष और विस्तृत शीर्ष की विशेष मुहर लगाई जाए.
