महिला आरक्षण और परिसीमन पर कल्पना सोरेन का केंद्र से सीधा सवाल, क्या अब देश चलाने के लिए डेटा की जरूरत नहीं रही?

रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा की कद्दावर नेता और विधायक कल्पना सोरेन मुर्मू ने महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के विस्तार को लेकर...

रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा की कद्दावर नेता और विधायक कल्पना सोरेन मुर्मू ने महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के विस्तार को लेकर केंद्र सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने सरकार की जल्दबाजी को लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंताजनक बताते हुए आंकड़ों की पारदर्शिता पर जोर दिया है.

हक के साथ डेटा भी जरूरी

कल्पना सोरेन ने स्पष्ट किया कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के पक्ष में उनकी पार्टी हमेशा से मजबूती से खड़ी रही है. उन्होंने कहा, लोकसभा हो या विधानसभा, महिलाओं को उनका हक मिलना ही चाहिए. इसमें कोई दो राय नहीं है. हालांकि, उन्होंने केंद्र की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या बिना सटीक आंकड़ों के देश चलाना संभव है?

बिना जनगणना की जल्दबाजी पर घेरा

कल्पना सोरेन ने केंद्र सरकार के फैसलों को तथ्यों से परे बताते हुए तीन मुख्य बिंदुओं पर प्रहार किया. उन्होंने लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना पर सवाल खड़े किए. बिना नई जनगणना के परिसीमन की प्रक्रिया को तर्कहीन बताया. कहा कि जनगणना और वास्तविक आंकड़ों के बिना लिया गया. कोई भी फैसला केवल भावनाओं पर आधारित है, जो देश के लोकतांत्रिक ढांचे को प्रभावित कर सकता है. यह सिर्फ एक नीति नहीं है, यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बदलने का फैसला है. ऐसे फैसले भावनाओं से नहीं, बल्कि ठोस तथ्यों और आंकड़ों से लिए जाने चाहिए.

लोकतंत्र के लिए जोखिम

कल्पना सोरेन ने आगाह किया कि बिना जनगणना के महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े कदम उठाना एक रहस्यमयी जल्दबाजी है. उन्होंने मांग की कि सरकार डेटा की अहमियत को समझे और पारदर्शी तरीके से जनगणना के आंकड़े सार्वजनिक करने के बाद ही आगे बढ़े.

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