Ranchi: आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने राज्य की बदहाल शिक्षा व्यवस्था और अटकी हुई शिक्षक नियुक्तियों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. उन्होंने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) के आयोजन में हो रही देरी को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं. सुदेश महतो ने पत्र में याद दिलाया कि झारखंड उच्च न्यायालय ने 31 मार्च 2026 तक जेटेट आयोजित करने का स्पष्ट आदेश दिया था, लेकिन सरकार इसे समय पर पूरा करने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के बाद से, यानी पिछले 10 सालों से परीक्षा न होना राज्य की बुनियादी शिक्षा के लिए घातक है.
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छात्रों के सपनों का दमन
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सुदेश ने कहा है कि परीक्षा और नियुक्तियों में पारदर्शिता के अभाव में लाखों बीएड और डीइएलईडी पास अभ्यर्थी मानसिक रूप से टूट रहे हैं. 10 सालों से परीक्षा न होने के कारण युवाओं को शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का मौका ही नहीं मिल रहा, जो उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. हर साल हजारों छात्र डिग्री लेकर निकल रहे हैं, लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया ठप होने के कारण उनकी उम्र सीमा खत्म होती जा रही है.
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पारदर्शिता और नई नियमावली की मांग
सुदेश महतो ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि सरकार जल्द से जल्द एक स्पष्ट नीति और नियमावली बनाकर झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करे. उन्होंने मांग की कि राज्य की सभी रिक्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया जाए, ताकि युवा प्रतिभाओं का दमन रोका जा सके. पात्र अभ्यर्थियों को नौकरी देना तो दूर, उन्हें परीक्षा में बैठने का अवसर तक न देना अत्यंत पीड़ादायक है. सरकार की यह सुस्ती युवाओं के हौसले को तोड़ रही है.
