Ranchi: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सोमवार को राजभवन में भारतीय ज्ञान परंपरा के एक नए अध्याय का सूत्रपात किया. उन्होंने वेद, पुराण, दर्शन और व्याकरण जैसे गंभीर विषयों पर आधारित शोध-आलेखों के विशिष्ट संकलन ‘वैशारदी’ का विधिवत लोकार्पण किया. यह ग्रंथ केवल कागजों का संकलन नहीं, बल्कि भारत की उस प्राचीन मेधा का आधुनिक दस्तावेजीकरण है, जो सदियों से हमारी पहचान रही है.
ज्ञान के संरक्षण पर जोर
लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ‘वैशारदी’ जैसे स्मृतिग्रंथ भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन में मील का पत्थर साबित होते हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में भारतीय संस्कृति और साहित्य शास्त्र के शोधपरक ज्ञान को सहेजने की नितांत आवश्यकता है.
इसे पढ़ें: झारखंड से सटे जशपुर के रतनपहली जंगल में विमान हादसा, पेड़ से टकराकर क्रैश हुआ एयरक्राफ्ट
शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक ग्रंथ
राज्यपाल ने संपादक मंडल की सराहना करते हुए कहा कि यह कृति न केवल अकादमिक जगत के लिए एक उपलब्धि है, बल्कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि यह शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए एक मार्गदर्शक ग्रंथ के रूप में अपनी पहचान बनाएगी.
इन विशेषज्ञों का रहा योगदान
• डॉ. नमिता सिंह
• डॉ. कंजीव लोचन
• डॉ. शैलेश कुमार मिश्र
• डॉ. धनंजय वासुदेव द्विवेदी
• गौरीनन्दन द्विवेदी
