Ranchi: झारखंड में आने वाले वर्षों में बिजली की मांग एक नए शिखर को छूने के लिए तैयार है. बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और कृषि क्षेत्र में बढ़ती सक्रियता के कारण राज्य में ऊर्जा की खपत तेजी से बढ़ रही है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगले पांच वर्षों में झारखंड की ‘पीक डिमांड’ (सर्वाधिक मांग) में भारी उछाल आने वाला है.
किस साल बिजली मांग पर कितना उछाल
झारखंड की बिजली जरूरतें साल-दर-साल नई ऊंचाइयों को छू रही हैं. वित्तीय वर्ष 2030-31 तक राज्य को अपनी पीक डिमांड को पूरा करने के लिए 3852.42 मेगावाट बिजली की आवश्यकता होगी. यह वर्तमान की तुलना में लगभग 678 मेगावाट की वृद्धि होगी.
• 2026-27: 3174.33 मेगावाट
• 2027-28: 3333.05 मेगावाट
• 2028-29: 3499.70 मेगावाट
• 2029-30: 3674.69 मेगावाट
• 2030-31: 3852.42 मेगावाट
बिजली के लीकेज पर 4120 करोड़ का मेगा प्लान
बिजली आपूर्ति से कहीं बड़ी चुनौती लाइन लॉस (बिजली का नुकसान) को कम करना है. इसके लिए राज्य सरकार ने 4120.39 करोड़ रुपए का बजट तैयार किया है. इस राशि का उद्देश्य बिजली चोरी रोकना और तकनीकी खामियों को दूर करना है. इसमें केंद्रीय सहायता के रूप में 2087.5 करोड़ रुपए मिलेंगे, जबकि राज्य की हिस्सेदारी 2032.79 करोड़ रुपए होगी.
पैसे कहां होंगे खर्च
स्मार्ट मीटरिंग: फीडर, ट्रांसफार्मर और उपभोक्ताओं के स्तर पर स्मार्ट मीटरिंग के लिए 858.02 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं.
वितरण ढांचा: बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नुकसान कम करने के कार्यों में 3262.27 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे.
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झारखंड के उपभोक्ताओं का गणित
कटेगरी उपभोक्ताओं की संख्या
• घरेलू- 49,39,641
• कॉमर्शियल- 4,43,822
• स्ट्रीट लाइट- 850
• उद्योग लो टेंशन- 29,333
• कृषि- 1,21,441
• हाईटेंशन(एचटी)- 2,663
• कुल उपभोक्ताओं की संख्या 55 लाख 37 हजार 750 है.
