NewsWave Desk: Systematic Investment Plan यानी SIP को लंबे समय में धन बनाने का एक सरल और भरोसेमंद तरीका माना जाता है. इसमें हर महीने एक तय रकम निवेश की जाती है और समय के साथ कंपाउंडिंग के जरिए पैसा बढ़ता है. हालांकि, कई निवेशक छोटी-छोटी गलतियों के कारण इसका पूरा फायदा नहीं उठा पाते, जिससे उनके रिटर्न पर असर पड़ता है.
बीच में SIP रोकना पड़ सकता है भारी
SIP की सबसे बड़ी ताकत नियमितता और अनुशासन है. बाजार में उतार-चढ़ाव या व्यक्तिगत कारणों से कई लोग अपनी SIP बंद कर देते हैं, जो एक बड़ी गलती साबित होती है. उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति 15 साल तक हर महीने 10 हजार रुपये निवेश करता है, तो वह एक बड़ा फंड बना सकता है. लेकिन बीच में SIP रोकने से लाखों रुपये का संभावित नुकसान हो सकता है.
इनकम बढ़े तो निवेश भी बढ़ाना जरूरी
अक्सर लोग अपनी SIP की रकम को सालों तक एक ही स्तर पर बनाए रखते हैं. जबकि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, निवेश को भी बढ़ाना चाहिए. हर साल थोड़ी-थोड़ी SIP बढ़ाने से लंबे समय में रिटर्न कई गुना बढ़ सकता है.
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Growth Plan ज्यादा फायदेमंद विकल्प
म्यूचुअल फंड में आमतौर पर दो विकल्प होते हैं—Growth और IDCW (डिविडेंड). Growth Plan में पैसा लगातार निवेश होता रहता है, जिससे कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिलता है. जबकि IDCW Plan में समय-समय पर पैसा मिल जाता है, लेकिन इससे कंपाउंडिंग का लाभ कम हो जाता है और टैक्स भी ज्यादा लग सकता है. लंबे समय के निवेश के लिए Growth Plan बेहतर माना जाता है.
बिना लक्ष्य के निवेश से नहीं मिलेगा पूरा फायदा
कई लोग SIP शुरू तो कर देते हैं, लेकिन यह तय नहीं करते कि वे किस उद्देश्य के लिए निवेश कर रहे हैं. निवेश को किसी लक्ष्य से जोड़ना जरूरी है, जैसे रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई, शादी या कोई बड़ा खर्च. इससे निवेश की दिशा स्पष्ट रहती है और लक्ष्य हासिल करना आसान होता है.
नियमित समीक्षा भी है जरूरी
SIP में निवेश करने के बाद उसे नजरअंदाज करना सही नहीं है. कम से कम साल में एक बार अपने निवेश की समीक्षा जरूर करनी चाहिए. यह देखना जरूरी है कि कौन सा फंड अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और कौन सा नहीं. अगर कोई फंड 18 से 24 महीने तक लगातार कमजोर प्रदर्शन करता है, तो उसे बदलने पर विचार करना चाहिए.
