EXCLUSIVE: आत्मसमर्पण नीति का असर: 2010 से अब तक 360 नक्सलियों ने छोड़ी हिंसा की राह, माओवादियों को सबसे बड़ा झटका

SAURAV SINGH Ranchi: सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का असर जमीन पर दिखने लगा है....

SAURAV SINGH

Ranchi: सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का असर जमीन पर दिखने लगा है. साल 2010 से लेकर 21 मई 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, विभिन्न प्रतिबंधित नक्सली और उग्रवादी संगठनों के कुल 360 नक्सलियों ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. झारखंड पुलिस के इस रिपोर्ट से पता चलता है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के चलते सबसे बड़ा नुकसान देश के सबसे बड़े नक्सली संगठन भाकपा माओवादी को हुआ है. 

संगठनों के आधार पर आत्मसमर्पण के कुल आंकड़े

  • पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 16 साल में अलग-अलग संगठनों से आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की कुल संख्या 360
  • भाकपा माओवादी संगठन को सबसे अधिक नुकसान हुआ है. इस संगठन के 260 नक्सलियों ने हथियार डाले.
  • झारखंड में भाकपा माओवादी के बाद सबसे अधिक पीएलएफआई उग्रवादी संगठन के 45 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया. 2016-17 के दौरान इस संगठन में बड़ी टूट देखी गई.
  • जेजेएमपी उग्रवादी संगठन के 31 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया.
  • टीपीसी उग्रवादी के 22 उग्रवादियों ने इस अवधि के दौरान आत्मसमर्पण किया.

आंकड़ों पर नजर डालें तो उग्रवादियों के आत्मसमर्पण की रफ्तार हर साल अलग रही है

  • 2010 से 2012: शुरुआती दौर में आत्मसमर्पण की गति धीमी थी. 2010 में 19, 2011 में 15 और 2012 में केवल 7 उग्रवादियों ने सरेंडर किया.
  • 2016 और 2017 (सबसे सफल वर्ष): यह उग्रवाद के खिलाफ सबसे टर्निंग पॉइंट साबित हुआ.
  • 2016 में कुल 39 उग्रवादियों ने हथियार डाले (जिसमें 21 माओवादी और 18 पीएलएफआई के थे).
  • साल 2017 रिकॉर्ड तोड़ वर्ष रहा, जहां कुल 46 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया. इसमें अकेले 39 माओवादी शामिल थे.
  •  2018 से 2022 का दौर: इस दौरान आत्मसमर्पण का सिलसिला लगातार जारी रहा. साल 2021 में 20 उग्रवादियों ने हथियार डाले, जिनमें पांच टीपीसी और एक जेजेएमपी का उग्रवादी शामिल था.
  • 2023 और 2024 में बढ़ी रफ्तार: उग्रवाद के खात्मे की ओर बढ़ते कदमों के बीच 2023 में 26 और 2024 में 24 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया. इसमें मुख्य रूप से माओवादी कैडर शामिल थे.
  • 2025 (जेजेएमपी के खिलाफ बड़ी कामयाबी): साल 2025 सुरक्षा बलों के लिए एक और बड़ी कामयाबी लेकर आया, जहां कुल 38 उग्रवादियों ने सरेंडर किया. इस साल की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें अकेले जेजेएमपी के 19 उग्रवादी शामिल थे, जिससे इस संगठन की कमर टूट गई.
  • 2026 (21 मई तक): इस वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में अब तक 28 नक्सली और उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ दिया है.

मुख्यधारा में लौटने की अपील

झारखंड पुलिस का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य भटके हुए युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाना है. आंकड़ों से साफ है कि उग्रवादी संगठनों का आधार अब पूरी तरह सिमट चुका है. प्रशासन ने बचे हुए उग्रवादियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और सरकार की नीति का लाभ उठाकर नया जीवन शुरू करें.

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