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EXCLUSIVE: चाईबासा ट्रेजरी घोटाला – ओडिशा, मोरहाबादी, पोटका और चाईबासा में SBI खातों में किए गए लाखों रुपये ट्रांसफर

सौरभ सिंह Ranchi: झारखंड के चाईबासा जिले में हुए बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले के मुख्य आरोपी सिपाही देव नारायण मुर्मू की जमानत याचिका...

चाईबासा ट्रेजरी घोटाला
चाईबासा ट्रेजरी घोटाला

सौरभ सिंह

Ranchi: झारखंड के चाईबासा जिले में हुए बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले के मुख्य आरोपी सिपाही देव नारायण मुर्मू की जमानत याचिका सीआईडी की स्पेशल कोर्ट ने खारिज कर दी है. उसकी जमानत याचिका का विरोध करते हुए सीआईडी ने कोर्ट में कई नए और गंभीर खुलासे किये हैं. सीआईडी की अब तक की जांच के मुताबिक झारखंड के वित्त विभाग और प्रधान महालेखाकार की समीक्षा के दौरान पश्चिम सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक कार्यालय के डीडीओ कोड SGH/POL/002 में भारी वित्तीय गड़बड़ी पकड़ी गई.

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कंप्यूटर डेटा और फाइलों के साथ छेड़छाड़

IFMS डेटा की जांच में सामने आया कि कुछ बैंक खातों को मल्टीपल पेई (कई लाभार्थियों के) खाते बनाकर पिछले कुछ वर्षों में 26,21,717 रुपए की अवैध निकासी की गई. आरोपी देव नारायण मुर्मू पुलिस अधीक्षक कार्यालय की एकाउंट्स शाखा में तैनात था. उसने अपने पद का फायदा उठाकर सरकारी दस्तावेजों, कंप्यूटर डेटा और फाइलों के साथ छेड़छाड़ की.

चाईबासा के डीसी द्वारा गठित संयुक्त जांच टीम ने जब भौतिक सत्यापन किया तो सरकारी फाइलों की हार्ड कॉपी और डिजिटल सॉफ्ट कॉपी के रिकॉर्ड आपस में मेल नहीं खाए. सिपाही देवनारायण मुर्मू ने ट्रेजरी घोटाले के जरिए की गई अवैध कमाई को ठिकाने लगाने के लिए 2017 से 2025 के बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की चार अलग-अलग शाखाओं के खातों का इस्तेमाल किया. ये बैंक खाते एसबीआई के हैं.

1. जमशेदपुर जिले के पोटका शाखा के खाता नंबर SBIN0006444 में सितंबर 2017 से मई 2022 तक पैसे ट्रांसफर किये गए.

2. एसबीआई टैगोर हिल के मोराबादी शाखा के खाता नंबर SBIN0016002 में सितंबर 2018 से फरवरी 2023 तक पैसे ट्रांसफर किये गए

3. एसबीआई चाईबासा के खाता नंबर SBIN0000052 में फरवरी 2021 से अक्टूबर 2024 तक पैसे ट्रांसफर किये गए

4. एसबीआई बहलदा मयूरभंज (ओडिशा) के खाता नंबर SBIN0012050 में अक्टूबर 2024 से मई 2025 तक पैसे ट्रांसफर किये गए

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क्या है आदेश में

सीआईडी कोर्ट ने आदेश में कहा है कि आरोपी कोई आम नागरिक नहीं बल्कि कानून व्यवस्था से जुड़ा सिपाही था जिसने भरोसे का कत्ल कर करीब 8 साल तक इस वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया. अभी सीआईडी की जांच बेहद संवेदनशील दौर में है और पैसे के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाया जा रहा है ऐसे में आरोपी को रिहा करने से सबूतों के साथ छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करने का वास्तविक खतरा है

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