NEWSWAVE IMPACT: खबर लिखे जाने के बाद पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने रद्द किया अभियंताओं का तबादला, वित्त विभाग की नियमों को ताक पर रखकर किया गया था ट्रांसफर

Akshay Kr. Jha Ranchi: एक बार फिर से NewswaveJharkhand की खबर का असर हुआ है. दो जुलाई को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग...

Akshay Kr. Jha

Ranchi: एक बार फिर से NewswaveJharkhand की खबर का असर हुआ है. दो जुलाई को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की तरफ से 15 इंजीनियरों का ट्रांस्फर किया गया था. इनमें से कई अभियंताओं का तबादला वित्त विभाग की नियमों को ताक पर रखकर किया गया था. तीन जुलाई को NewswaveJharkhand ने “विभाग की तो छोड़िए, CM के निर्देश का भी पालन करता है यह विभाग, फाइनेंस डिपार्मेंट के नियमों को ताक पर रखकर कर दिया तबादला” शीर्षक से खबर प्रकाशित किया. खबर प्रकाशित किए जाने के बाद छह जुलाई को विभाग ने खबर का संज्ञान लिया और तबादला किए गए 15 में से छह इंजीनियरों का ट्रांसफर रद्द कर दिया. उन्हें अगले आदेश तक यथावत बने रहने का निर्देश दिया गया है. 

क्या है वित्त विभाग की चिट्ठी में 

वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार की तरफ से 19 मई को सभी विभागों को एक निर्देश जारी किया गया. विभाग के सचिव ने साफ तौर से कहा कि विभाग के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें कम वेतनमान के पदाधिकारी को स्वतंत्र चालू प्रभार के तहत ऊंचे पद का प्रभार दिया जा रहा है. बीते समय में संबंधित पदाधिकारी की तरफ से ऊंचे पद पर कार्यरत अवधि के वेतन के अंतर के राशि के भुगतान के लिए हाईकोर्ट में मामला दायर किया जाता है. इस संदर्भ में उन मामलों में हाईकोर्ट से ऐसे पदाधिकारी के पक्ष में निर्णय दिया गया है. और उन्हें ऊंचे पद का वेतन भुगतान किया जाता है.

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मुख्यमंत्री के निर्देश को भी नहीं माना गया था

वित्त विभाग की तरफ से सभी विभागों को लिखी गयी चिट्ठी में आगे लिखा गया है कि यहां यह बताना जरूरी है कि कम वेतनमान के पदाधिकारी को स्वतंत्र चालू प्रभार के तहत ऊंचे पद का प्रभार दिए जाने के संबंध में झारखंड सेवा संहिता में कोई प्रावधान नहीं है. इसलिए इस संबंध में मुख्यमंत्री से प्राप्त निर्देश और प्रावधानों के मुताबिक निर्देश है कि कम वेतन मान के पदाधिकारी को स्वतंत्र चालू प्रभार के तहत ऊंचे पद का प्रभार दिए जाने की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए.

लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश को भी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की तरफ से नहीं माना गया और 15 सहायक अभियंताओं को प्रभारी कार्यपालक अभियंता बनाकर तबादला कर दिया गया था. ऐसे में अगर यह सभी अभियंता हाईकोर्ट की शरण लेते, तो पहले के आदेश के मुताबिक इन्हें ऊंचे पद का वेतन देना होता. ऐसा होने से सीधा सरकार के खजाने पर असर पड़ता.

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