Ranchi: 2 जुलाई को 15 इंजीनियरों का तबादला हुआ. विभाग का नाम है पेयजल एवं स्वच्छता विभाग. इन सभी इंजीनियरों को प्रभारी कार्यपालक अभियंता बनाकर एक जिले से दूसरे जिले में भेजा गया. लेकिन इनका मूल पद सहायक अभियंता है. अभी इनमें से किसी का प्रमोशन कार्यपालक अभियंता के पद पर नहीं हुआ है. फिर भी इन्हें कार्यपालक अभियंता का पद दे दिया गया. ऐसा विशेष परिस्थिति में किया जा सकता है. कई विभागों में इससे पहले ऐसा हुआ है कि जूनियर पद के अधिकारी को बिना प्रमोशन ही सीनियर पद दे दिया जाता है. लेकिन मामला गंभीर तब हो गया जब वित्त विभाग की तरफ से एक चिट्ठी जारी की गयी. चिट्ठी हर विभाग के सचिव को लिखी गयी. फिर भी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग वित्त विभाग के निर्देशों को नहीं मान रहा है.
क्या है वित्त विभाग की चिट्ठी में
वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार की तरफ से 19 मई को सभी विभागों को एक निर्देश जारी किया गया. विभाग के सचिव ने साफ तौर से कहा कि विभाग के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें कम वेतनमान के पदाधिकारी को स्वतंत्र चालू प्रभार के तहत ऊंचे पद का प्रभार दिया जा रहा है. बीते समय में संबंधित पदाधिकारी की तरफ से ऊंचे पद पर कार्यरत अवधि के वेतन के अंतर के राशि के भुगतान के लिए हाईकोर्ट में मामला दायर किया जाता है. इस संदर्भ में उन मामलों में हाईकोर्ट से ऐसे पदाधिकारी के पक्ष में निर्णय दिया गया है. और उन्हें ऊंचे पद का वेतन भुगतान किया जाता है. Transfer List

मुख्यमंत्री के निर्देश को भी नहीं माना गया
वित्त विभाग की तरफ से सभी विभागों को लिखी गयी चिट्ठी में आगे लिखा गया है कि यहां यह बताना जरूरी है कि कम वेतनमान के पदाधिकारी को स्वतंत्र चालू प्रभार के तहत ऊंचे पद का प्रभार दिए जाने के संबंध में झारखंड सेवा संहिता में कोई प्रावधान नहीं है. इसलिए इस संबंध में मुख्यमंत्री से प्राप्त निर्देश और प्रावधानों के मुताबिक निर्देश है कि कम वेतन मान के पदाधिकारी को स्वतंत्र चालू प्रभार के तहत ऊंचे पद का प्रभार दिए जाने की व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए. लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश को भी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की तरफ से नहीं माना गया और 15 सहायक अभियंताओं को प्रभारी कार्यपालक अभियंता बनाकर तबादला कर दिया गया. ऐसे में अगर यह सभी अभियंता हाईकोर्ट की शरण लेते हैं, तो पहले के आदेश के मुताबिक इहें ऊंचे पद का वेतन देना होगा. ऐसा होने से सीधा सरकार के खजाने पर असर पड़ेगा.
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