Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं पर उठने वाले सवालों की फेहरिस्त में एक और सनसनीखेज अध्याय जुड़ गया है. सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) मुख्य परीक्षा के परिणाम ने प्रदेश के मेधावी छात्रों के भीतर आक्रोश की ऐसी आग भड़काई है, जिसने आयोग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है. आरोप बेहद गंभीर और हैरान करने वाले हैं. परीक्षा हॉल में कॉपियां जानबूझकर खाली छोड़ना और फिर पर्दे के पीछे से उन्हें भरकर ‘चयनित’ सूची में नाम दर्ज कराना.
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सबूतों के साथ खुला राज
इस पूरे विवाद के केंद्र में रोल नंबर 24313315 की वह अभ्यर्थी है, जिसने परीक्षा के दौरान न केवल हिंदी, अंग्रेजी, जीएस, बल्कि ऐच्छिक विषयों के पेपर भी कोरे छोड़ दिए थे. चश्मदीद अभ्यर्थियों का दावा है कि वह घंटों बैठी रही, लेकिन कलम नहीं चलाई. अभ्यर्थियों का आरोप है कि इसके पुख्ता डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं. परिणाम आने के बाद जब उसी संदिग्ध रोल नंबर का नाम चयन सूची में चमका, तो छात्रों का शक हकीकत में बदल गया.

क्या है अभ्यर्थियों की मांग?
• उत्तर पुस्तिकाओं की फॉरेंसिक जांच: छात्र मांग कर रहे हैं कि संबंधित रोल नंबर की कॉपियों की हैंडराइटिंग और इंक की फॉरेंसिक जांच हो. यह स्पष्ट होना चाहिए कि स्याही परीक्षा हॉल की है या किसी ‘गुप्त ठिकाने’ की.
• सीसीटीवी का सच: परीक्षा केंद्र की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक की जाए, ताकि यह साफ हो सके कि अभ्यर्थी वाकई परीक्षा दे रही थी या केवल समय काट रही थी.
• मिलीभगत की परतें: इस मामले में इनविजीलेटर्स और परीक्षा संचालक एजेंसी की भूमिका संदिग्ध है. आखिर खाली कॉपी जमा होने पर भी उन्होंने चुप्पी क्यों साधे रखी.
छात्रों की अंतिम चेतावनी
प्रतियोगी छात्रों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की गुहार लगाई है. उनका स्पष्ट कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस संवैधानिक संस्था को बचाने के लिए है जिसकी साख पिछले कुछ वर्षों में लगातार दांव पर लगी है.
