Hazaribagh : मानसून की पहली तेज बारिश और आसमान में गरजते बादलों के साथ ही टाटीझरिया प्रखंड के सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. जिन तड़ित चालकों को बच्चों और स्कूल भवनों को वज्रपात से सुरक्षित रखने के लिए लगाया गया था, उनमें से अधिकांश वर्षों से खराब पड़े हैं. न तो उनकी नियमित जांच हो रही है और न ही मरम्मत. ऐसे में हर बार बादल गरजने पर बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों की चिंता बढ़ जाती है.
66 विद्यालयों के करीब 20 हजार बच्चों पर मंडरा रहा खतरा
प्रखंड के 66 सरकारी और कई गैर-सरकारी विद्यालयों में लगभग 20 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं. अधिकांश सरकारी स्कूलों में वर्षों पहले तड़ित चालक लगाए गए थे, लेकिन रख-रखाव के अभाव में वे अब केवल दिखावे की वस्तु बनकर रह गए हैं. कई स्थानों पर लोहे की छड़ें तो लगी हैं, लेकिन उनका अर्थिंग सिस्टम पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है. जानकारी के अनुसार, विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था का दावा तो किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. पूरे प्रखंड में गिने-चुने विद्यालय ऐसे हैं, जहां तड़ित चालक सही स्थिति में हैं. अधिकांश स्कूलों में उपकरण जंग खा चुके हैं या उनकी वायरिंग टूट चुकी है. इससे वज्रपात होने की स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल हो सकती है.
बारिश शुरू होते ही बच्चों में बढ़ जाता है डर
विद्यालयों के शिक्षक बताते हैं कि तेज गर्जना और बिजली चमकते ही बच्चे घबरा जाते हैं. कई छोटे बच्चे रोने लगते हैं तो कुछ कक्षा से बाहर निकलने की कोशिश करते हैं. ऐसे समय में शिक्षकों को पढ़ाई छोड़कर बच्चों को शांत कराने में समय देना पड़ता है. ग्रामीण अभिभावकों का कहना है कि बारिश के दिनों में बच्चों को स्कूल भेजते समय मन में हमेशा डर बना रहता है. जब भी मौसम खराब होता है, सबसे पहले यही चिंता सताती है कि कहीं स्कूल भवन पर बिजली न गिर जाए. उनका कहना है कि सरकार बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे और सभी विद्यालयों के तड़ित चालकों की तत्काल जांच कराए.
हर साल जारी होता है अलर्ट, लेकिन तैयारी नहीं
मौसम विभाग मानसून के दौरान लगातार वज्रपात को लेकर येलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी करता है. झारखंड वज्रपात की घटनाओं से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है. इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में सुरक्षा मानकों का पालन गंभीरता से नहीं किया जा रहा है. ग्रामीणों के अनुसार खुले मैदान, ऊंचे भवन और पेड़ों के आसपास स्थित विद्यालयों में वज्रपात का खतरा अधिक रहता है. ऐसे विद्यालयों में कार्यशील तड़ित चालक होना अनिवार्य है. यदि उपकरण खराब हो जाएं तो बिजली सीधे भवन को नुकसान पहुंचा सकती है और जान-माल का बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है.
रख-रखाव की व्यवस्था नहीं
स्कूलों में तड़ित चालक लगाने के बाद उनकी समय-समय पर तकनीकी जांच और अर्थिंग की मरम्मत आवश्यक होती है. लेकिन वर्षों से अधिकांश विद्यालयों में इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई. नतीजा यह है कि लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए सुरक्षा उपकरण अब बेकार साबित हो रहे हैं. स्थानीय लोगों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से सभी विद्यालयों का सुरक्षा ऑडिट कराएं. जहां तड़ित चालक खराब हैं, उन्हें तत्काल बदलकर नए उपकरण लगाए जाएं तथा हर वर्ष मानसून से पहले उनकी तकनीकी जांच अनिवार्य की जाए.
