कराईकेला में निकली प्रभु जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, भाई बलभद्र व बहन सुभद्रा संग मौसीबाड़ी के लिए हुए प्रस्थान

Chakradharpur/Bandgaon: पश्चिमी सिंहभूम जिले के कराईकेला जगन्नाथ मंदिर से गुरुवार को भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की भव्य...

भारी बारिश के बीच प्रभु जगन्नाथ का रथ खींचते श्रद्धालु
भारी बारिश के बीच प्रभु जगन्नाथ का रथ खींचते श्रद्धालु

Chakradharpur/Bandgaon: पश्चिमी सिंहभूम जिले के कराईकेला जगन्नाथ मंदिर से गुरुवार को भगवान श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की भव्य रथयात्रा भारी बारिश के बीच भी श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ निकाली गई. रथयात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए और जय जगन्नाथ के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा. रथयात्रा से पूर्व सुबह से ही श्री जगन्नाथ मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगी रही. दोपहर में महाप्रभु को महाप्रसाद का भोग अर्पित किया गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया. शाम करीब पांच बजे धार्मिक परंपरा के अनुसार छौंरा-पौंरा अनुष्ठान का आयोजन हुआ. 64 मौजा के देवरी द्वारा मंदिर परिसर में गंगाजल का छिड़काव कर झाड़ू लगाया गया. इसके उपरांत पंडित जगदीश ठाकुर, भरत मिश्रा एवं ललित नारायण ठाकुर ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथ पर विराजमान कराया.

जय जगन्नाथ के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने खींचा रथ

महाप्रभु के रथ पर विराजमान होते ही जय जगन्नाथ के गगनभेदी नारों के बीच सैकड़ों श्रद्धालुओं ने गाजे-बाजे के साथ रथ को खींचा. श्रद्धालुओं ने लड्डू का भोग अर्पित किया तथा प्रसाद का वितरण किया. देर शाम रथ बड़ोदांडो पहुंचा, जहां श्रद्धालुओं ने महाप्रभु का भव्य स्वागत किया. शुक्रवार को भगवान श्री जगन्नाथ का रथ गुंडीचा धाम (मौसीबाड़ी) के लिए प्रस्थान करेगा. इस अवसर पर संध्या में भजन-कीर्तन का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए. कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे आयोजन को भक्ति और उत्साह से सराबोर कर दिया. रथयात्रा के सफल आयोजन में प्रशांत साहू, ललित नारायण ठाकुर, लोकनाथ सारंगी, कान्हा त्रिपाठी, बिट्टू मिश्रा, गिरधारी मंडल, शंकर महापात्र, बाबा सारंगी, कान्हु साहू, कुना मिश्रा, डॉ. तुलसी महतो, राजेंद्र मेलगांडी सहित अनेक श्रद्धालुओं का सराहनीय योगदान रहा.

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