रांची : झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन हटिया विधानसभा क्षेत्र के विस्थापितों का मुद्दा सदन में उठा. विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि विस्थापितों के पुनर्वास के लिए वर्ष 2019 में करीब 212 करोड़ रुपये की लागत से मकान बनकर तैयार हो चुके हैं, लेकिन अब तक लोगों को वहां बसाया नहीं गया है. उन्होंने बताया कि कुल 393 विस्थापित परिवारों को इन आवासों में बसाने की योजना थी, जो अब तक लंबित है.

निजी कंपनी से कराया गया सत्यापन
इस पर जवाब देते हुए मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि विस्थापितों के सत्यापन की प्रक्रिया में ही गंभीर गड़बड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि देश में शायद पहली बार ऐसा हुआ कि विस्थापितों का सत्यापन कोलकाता की एक निजी परामर्शी कंपनी से कराया गया. इसी कारण इसकी बुनियाद ही गलत साबित हुई. परामर्शी कंपनी द्वारा दी गई सूची की फिलहाल समीक्षा की जा रही है.
गांवों की सूची और वास्तविक विस्थापितों पर सवाल
विधायक नवीन जायसवाल ने यह भी कहा कि विस्थापितों को सरकारी और गैर-सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने का प्रावधान था और इस संबंध में एमओयू भी किया गया था. इस पर मंत्री ने कहा कि विस्थापित गांवों की सूची में आठ गांव शामिल थे, लेकिन जगन्नाथपुर और कल्याणपुर को इसमें शामिल नहीं किया गया. इसके अलावा पंचाट की सूची से भी कई नाम मेल नहीं खाते हैं.
बाहरी लोगों पर जमीन लेने की कोशिश का आरोप
मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि विस्थापितों के नाम पर कुछ बाहरी लोग जमीन लेने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. लाबेद और तिरिल गांव में सर्वे के लिए गई टीम का विरोध भी किया गया था. उन्होंने साफ कहा कि सरकार द्वारा अधिग्रहित जमीन रैयतों को वापस नहीं की जा सकती. हालांकि वास्तविक विस्थापितों का पुनर्वास जरूर किया जाएगा और उनके साथ अन्याय नहीं होगा. मंत्री ने कहा कि अगले सत्र से पहले इस मामले में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी.

