रांची: 7 साल बाद मिला इंसाफ, सड़क हादसे में जान गंवाने वाली महिला के परिवार को 49.72 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

Ranchi: सात वर्ष पुराने सड़क हादसे में अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), रांची ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मृतका के परिजनों...

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Ranchi: सात वर्ष पुराने सड़क हादसे में अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), रांची ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए मृतका के परिजनों को 49.72 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. अधिकरण ने वाहन की बीमा कंपनी बजाज आलियांज जेनरल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया है, कि वह आदेश की तिथि से दो माह के भीतर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित पूरी राशि का भुगतान करे.

मामला 10 जून 2019 का

यह मामला 10 जून 2019 का है. डोरंडा निवासी मुन्नी देवी सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकली थीं, इसी दौरान पीछे से तेज गति और लापरवाही से आ रही एक स्कॉर्पियो ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी. हादसे के बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल राज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच करते हुए वाहन चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और जांच पूरी होने पर न्यायालय में चार्जशीट भी दाखिल की गई. इससे यह स्पष्ट हुआ कि दुर्घटना चालक की लापरवाही के कारण हुई थी.

एमएसीटी में मुआवजा के लिए पति ने किया था दावा

मृतका के पति अनिल कुमार राय और उनके बच्चों ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) में मुआवजे के लिए दावा याचिका दाखिल की थी. सुनवाई के दौरान अधिकरण ने पुलिस रिकॉर्ड, चार्जशीट, गवाहों के बयान तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया. अधिकरण इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि दुर्घटना पूरी तरह वाहन चालक की लापरवाही का परिणाम थी और दुर्घटना के समय संबंधित स्कॉर्पियो का वैध बीमा बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के पास था. इसी आधार पर बीमा कंपनी को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी ठहराया गया.

मुआवजे की राशि तय करते समय अधिकरण ने मृतका की संभावित आय, भविष्य में आय बढ़ने की संभावना,आश्रित परिवार के सदस्यों की निर्भरता, पारिवारिक क्षति तथा अन्य पारंपरिक मदों को ध्यान में रखा. इन सभी पहलुओं के आधार पर कुल 49 लाख 72 हजार रुपये मुआवजा निर्धारित किया गया.

सड़क दुर्घटना मामलों में महत्वपूर्ण फैसला

कानूनी जानकारों के अनुसार, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के ऐसे फैसले सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार मुआवजे की गणना में मृतक की आय, भविष्य की संभावनाएं, आश्रितों की संख्या और अन्य मदों को शामिल किया जाता है. इसी आधार पर अधिकरण ने इस मामले में भी विस्तृत गणना कर मुआवजा तय किया. इस फैसले से मृतका के परिवार को लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद बड़ी राहत मिली है. यदि बीमा कंपनी निर्धारित दो माह की अवधि में राशि का भुगतान नहीं करती है, तो आदेश के अनुपालन के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा सकती है.

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