अमित वर्मा
Lohardaga: नेतरहाट आवासीय विद्यालय की तर्ज पर संचालित आवासीय विद्यालयों तथा इंदिरा गांधी बालिका विद्यालय, हजारीबाग में कक्षा छह में नामांकन के लिए शुक्रवार को लोहरदगा शहर स्थित बालिका उच्च विद्यालय में प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई. परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, लेकिन परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र और विद्यालयीय नामांकन से जुड़े तथ्यों ने पूरी प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रारंभिक पड़ताल में फर्जी नामांकन और नियमों के विपरीत आवेदन किए जाने की आशंका सामने आई है, जिसके बाद पूरे मामले की जांच की मांग तेज हो गई है.
प्रवेश पत्रों की जांच में सामने आईं विसंगतियां
जानकारी के अनुसार इंदिरा गांधी बालिका विद्यालय, हजारीबाग, बालिका आवासीय विद्यालय चाईबासा, दुमका समेत अन्य आवासीय विद्यालयों में नामांकन के लिए बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए. परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्रों का मिलान करने पर कई विसंगतियां सामने आईं. कई आवेदन पत्रों में अभ्यर्थियों का विद्यालय कुडू प्रखंड का जीमा मध्य विद्यालय दर्ज है, जबकि कुछ मामलों में जिस विद्यालय में नामांकन दर्शाया गया है, वहां संबंधित छात्र-छात्राओं का पूर्व में अध्ययन नहीं रहा है.


मई-जून में नामांकन, फिर प्रवेश परीक्षा
प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित बच्चों का नामांकन इसी वर्ष मई अथवा जून माह में कराया गया और उसी समय से उनकी उपस्थिति भी दर्ज की जाने लगी. जबकि प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 16 मई 2026 से शुरू हुई थी और अंतिम तिथि 30 जून 2026 थी. परीक्षा 24 जुलाई 2026 को आयोजित हुई. ऐसे में परीक्षा से महज एक से डेढ़ माह पहले हुए नामांकन ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है.
कक्षा पांचवीं कहीं और, नामांकन जीमा विद्यालय में
मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि संबंधित अभ्यर्थियों ने कक्षा पांचवीं की पढ़ाई जीमा मध्य विद्यालय से पूरी नहीं की थी. इसके बावजूद हाल के महीनों में वहां नामांकन कराकर उसी आधार पर प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन किया गया. इससे आशंका जताई जा रही है कि केवल परीक्षा में शामिल कराने के उद्देश्य से नामांकन कराया गया.
बाहरी जिलों से पहुंचे अभ्यर्थियों ने बढ़ाया संदेह
परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद कई अभिभावकों ने बताया कि वे बालूमाथ, चतरा, रांची, सिसई, कालेबिरा, लातेहार समेत विभिन्न क्षेत्रों से बच्चों को परीक्षा दिलाने पहुंचे थे. कई अभिभावक शहर के होटलों में भी ठहरे हुए थे. इससे स्थानीय लोगों में यह आशंका और गहरा गई कि बाहरी छात्रों का स्थानीय विद्यालयों में नामांकन कराकर उन्हें प्रवेश परीक्षा में शामिल कराया गया.
पिछले वर्ष भी उठा था ऐसा मामला
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले वर्ष भी नेतरहाट आवासीय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा के दौरान फर्जी नामांकन और आवेदन का मामला सामने आया था. इस वर्ष फिर वैसी ही शिकायतें सामने आने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और नामांकन प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं.
प्रभारी प्रधानाध्यापिका ने क्या कहा
जीमा मध्य विद्यालय, कुडू की प्रभारी प्रधानाध्यापिका सुशीला तिर्की ने कहा कि संबंधित बच्चों का विद्यालय में नामांकन है. उन्होंने बताया कि फिलहाल वे साइकिल वितरण कार्यक्रम में व्यस्त हैं, इसलिए विस्तृत जानकारी बाद में उपलब्ध करा सकेंगी.
डीएसई ने दिए जांच के संकेत
जिला शिक्षा अधीक्षक अभिजीत कुमार ने कहा कि यदि जांच में नियमों के विरुद्ध नामांकन या आवेदन किए जाने की पुष्टि होती है, तो पूरे मामले की विस्तृत जांच कर प्रतिवेदन विभाग को भेजा जाएगा तथा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले में शिक्षा विभाग की जांच और उसके निष्कर्ष पर सभी की निगाहें टिकी हैं. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित विद्यालयों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. वहीं स्थानीय अभिभावकों और विद्यार्थियों ने मांग की है कि प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो, ताकि वास्तविक पात्र विद्यार्थियों के अधिकार सुरक्षित रह सकें.
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