Ravi Bharti
Ranchi: झारखंड के राज्यपाल के रूप में संतोष कुमार गंगवार के दो वर्ष का कार्यकाल महज एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि आम जनमानस के साथ सीधा संवाद स्थापित करने और राज्य के विकास को नई दिशा देने का एक स्वर्णिम अध्याय बन गया है. इन दो वर्षों में उन्होंने राजभवन भवन को केवल एक प्रशासनिक केंद्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे झारखंड की जनता के लिए स्नेह, विश्वास और समाधान का जीवंत मंच यानी वास्तविक अर्थों में लोक भवन में बदल दिया. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के दो साल कुछ ऐसे ही रहे हैं. अपने लंबे सार्वजनिक जीवन के अनुभव, बेदाग सादगी और दिल में आम आदमी के प्रति अगाध संवेदना को समेटे हुए, उन्होंने जब झारखंड की धरती पर कदम रखा, तो यह केवल एक नई जिम्मेदारी नहीं थी, बल्कि राज्य के हर वंचित, शोषित, युवा और किसान के जीवन को छूने का एक पवित्र संकल्प था. आज अपने दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर जब उन्होंने समाज के हर वर्ग के साथ अपने अनुभव साझा किए, तो हर आंख में इस बात की चमक थी कि उनका अभिभावक सचमुच उनकी फिक्र करता है.
राज भवन से लोक भवन तक, जनता के द्वार हमेशा खुले
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने अपनी कार्यशैली से यह साबित कर दिया है कि पद की गरिमा ऊंचे दीवारों से नहीं, बल्कि जनता के साथ जुड़ाव से तय होती है. उन्होंने लोक भवन के दरवाजों को हर आम नागरिक, किसान, युवा, महिला और बुद्धिजीवी के लिए हमेशा खुला रखा.समाज के विभिन्न वर्गों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर उन्होंने लोगों की समस्याओं को समझा और उनके त्वरित समाधान की दिशा में प्रयास किया. अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन कुलकर्णी ने अपने स्वागत भाषण में बिल्कुल सही रेखांकित किया कि इस भवन का नाम भले ही पहले राज भवन था, किंतु राज्यपाल की जनोन्मुखी और संवेदनशील कार्यशैली ने इसे वास्तविक अर्थों में ‘लोक भवन’ बना दिया.इन दो वर्षों के कार्यों, पहलों और उपलब्धियों का जीवंत दस्तावेज संवाद से विश्वास पुस्तक के रूप में लोकार्पित किया गया, जो उनके सक्रिय और संवेदनशील कार्यकाल का एक सशक्त प्रमाण है.
विश्वविद्यालयों को बनाया उत्कृष्टता का केंद्र
राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल गंगवार का विशेष फोकस उच्च शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना रहा है. उनका दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा ही किसी भी समाज के कायाकल्प की सबसे बड़ी कुंजी है.उन्होंने सभी कुलपतियों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विश्वविद्यालयों में ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करें जो अनुसंधान, नवाचार और उच्च कोटि की शिक्षा से परिपूर्ण हो.
विकसित भारत-2047 का संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के सपने को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि झारखंड की अपार युवा शक्ति, प्राकृतिक संपदा और जनजातीय विरासत इस राष्ट्रीय विकास यात्रा में सबसे बड़ी ताकत बन सकती है. रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सरोज शर्मा और झारखंड खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अभय कुमार सिंह ने एक स्वर में कहा कि राज्यपाल के कुशल मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच ने राज्य में उच्च शिक्षा को एक नई दिशा दी है, जिससे संस्थान निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं.

अमर सेनानियों को नमन और जनजातीय संस्कृति का सम्मान
राज्यपाल ने अपने संबोधन में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, फूलो-झानो, नीलाम्बर-पीताम्बर और ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव सहित तमाम अमर सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया. उन्होंने कहा कि इन महान विभूतियों के आदर्श आज भी हमारे समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा हैं. उन्होंने राज्य के दूर-दराज के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों का व्यापक दौरा किया और वहां के लोगों की जीवनशैली, सरलता और परिश्रम को बहुत करीब से महसूस किया.
महिला सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रसार
विकास की धुरी हमेशा समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचनी चाहिए. राज्यपाल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से हमारी माताएं और बहनें आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, जो एक आत्मनिर्भर झारखंड की नींव रख रहा है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाई और यह विश्वास जताया कि सरकार का सकारात्मक सहयोग भविष्य में भी झारखंड को विकास के नए आयामों तक पहुंचाता रहेगा.
