Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने झारखंड आंदोलन के महानायक, पूर्व मुख्यमंत्री और दिशोम गुरु को याद करते हुए कहा है कि गुरुजी सादगी और संघर्ष के प्रतीक थे. उन्होंने कहा कि 4 अगस्त का दिन केवल एक पुण्यतिथि नहीं, बल्कि झारखंड के लिए आत्ममंथन और संकल्प का दिन है.
संघर्ष की भट्ठी से निकले जननायक
शिबू सोरेन का जीवन संघर्षों की अनूठी मिसाल रहा है. महाजनी प्रथा और सूदखोरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले उनके पिता सोबरन सोरेन की हत्या के बाद, उन्होंने निराशा की जगह संघर्ष का कठिन मार्ग चुना. आदिवासियों, किसानों और मजदूरों के जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उनके द्वारा छेड़ा गया जनआंदोलन इतिहास बन गया. जिसके बाद जनता ने उन्हें स्नेहपूर्वक दिशोम गुरु की उपाधि दी.
सादगी और जनसेवा की मिसाल
मुख्यमंत्री जैसे सर्वोच्च पद पर रहने के बावजूद गुरुजी की सादगी में कभी कोई बदलाव नहीं आया. वे हमेशा आम जनता के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते थे. उनका यह मानना था कि जो नेता कुर्सी पर बैठता है. वह जनता का असली दर्द नहीं समझ सकता. उनका पूरा जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति के अधिकार और स्वाभिमान को समर्पित रहा.
अलग झारखंड राज्य के सूत्रधार
अलग झारखंड राज्य के निर्माण में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता. उन्होंने इस मांग को केवल राजनीतिक मुद्दा न रखकर सामाजिक अस्मिता का आंदोलन बनाया. जिसके परिणामस्वरूप 15 नवंबर 2000 को अलग राज्य का सपना साकार हुआ. वर्ष 2026 में भारत सरकार द्वारा उन्हें लोक सेवा के क्षेत्र में मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना उनके राष्ट्रव्यापी योगदान की सच्ची राष्ट्रीय स्वीकृति है.
आदर्शों पर चलने का संकल्प
झारखंड प्रदेश कांग्रेस परिवार ने गुरुजी के बताए मार्ग पर चलने और उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया है. उनके विचार और जनसेवा का भाव सदैव झारखंड की आत्मा में जीवंत रहेगा.

