Ranchi: पूरा झारखंड भक्ति के रंग में सराबोर हो चुका है. 3 अगस्त को जब सावन की पहली सोमवारी का सूर्योदय हुआ, तो देवघर के द्वादश ज्योतिर्लिंग से लेकर राजधानी रांची के ऐतिहासिक और पौराणिक पहाड़ी मंदिर तक, हर ओर केवल बोल बम, हर-हर महादेव और जय बाबा भोले के अलौकिक जयघोष गूंज उठे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रदेशवासियों को सावन की पहली सोमवारी की आत्मीय शुभकामनाएं देते हुए कामना की है कि बाबा बैद्यनाथ की असीम कृपा और आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बना रहे. राज्य सरकार ने देवघर, दुमका और प्रदेश के तमाम शिवधामों में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सुगम यात्रा के लिए चाक-चौबंद व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं. सोमवार को राज्यभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं ने अटूट आस्था के साथ देवाधिदेव महादेव का जलाभिषेक किया.
CM हेमंत की शुभकामनाएं
सावन के इस पावन पर्व पर प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया संदेश के माध्यम से झारखंड और देश-विदेश से आने वाले शिवभक्तों का अभिनंदन किया. कहा कि बाबा बैद्यनाथ की असीम कृपा आप सभी पर बनी रहे. राज्य सरकार द्वारा देवघर एवं दुमका आने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि आपकी यात्रा सुरक्षित, सुगम एवं मंगलमय हो.
रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में उमड़ी भारी भीड़
राजधानी रांची के बीचों-बीच स्थित ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में सावन की पहली सोमवारी को जो आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला, वह अद्भुत और अविस्मरणीय रहा. तड़के सुबह 3:30 बजे से ही भक्तों का पहाड़ी की तलहटी में जुटना शुरू हो गया था. मंदिर प्रशासन ने ठीक सुबह 4:00 बजे दर्शन और जलार्पण के कपाट खोल दिए, जिसके साथ ही भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—सभी उम्र के लोगों में भगवान भोलेनाथ के दर्शन की होड़ सी लगी थी. भक्तों के हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, दूध, चंदन और रोली से सजी थालियां थीं. हर कोई अपनी बारी का इंतजार करते हुए भगवान शिव के मंत्रों का जाप कर रहा था. सीढ़ियों से लेकर गर्भगृह तक केवल भक्ति और आध्यात्मिकता की बयार बह रही थी.
प्रशासनिक मुस्तैदी और जनसहयोग
लाखों की संख्या में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करना और हर श्रद्धालु को सुगमता से दर्शन कराना एक बड़ी चुनौती होती है, लेकिन इस बार जिला प्रशासन, पहाड़ी मंदिर विकास समिति, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवकों, आदिवासी समाज तथा पहन समाज के प्रतिनिधियों ने मिलकर जो समन्वय दिखाया, उसने एक बेहतरीन मिसाल पेश की. भीड़ के भारी दबाव को एक जगह केंद्रित होने से रोकने के लिए मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के लिए पूरी तरह से अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए गए थे. कतारों को अनुशासित रखने के लिए महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी. मुख्य गर्भगृह में जलार्पण के दौरान पहले महिलाओं को प्राथमिकता के साथ प्रवेश दिया गया, जिससे व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही. जगह-जगह तैनात स्वयंसेवक और प्रशासनिक अधिकारी लगातार श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते रहे. भारी भीड़ के बावजूद कहीं भी भगदड़ या अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई.

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राजधानी के अन्य शिवालयों में भी गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे
पहाड़ी मंदिर के अतिरिक्त राजधानी रांची के महाकाल मंदिर और अन्य प्राचीन शिवालयों में भी सावन की पहली सोमवारी पर भारी चहल-पहल रही. अत्यधिक भीड़ को ध्यान में रखते हुए कई प्रमुख मंदिरों में अर्घा सिस्टम की व्यवस्था की गई थी, जिससे दूर से ही कतारबद्ध भक्त बिना किसी रुकावट के सीधे शिवलिंग पर जल अर्पित कर सके. कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर परिसरों में अतिरिक्त पुलिस बल, महिला बटालियन के जवान और खुफिया सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे. संपूर्ण मंदिर परिसर को सीसीटीवी कैमरों की लाइव निगरानी में रखा गया था, ताकि हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा सके.
