रांची. झारखंड वन विभाग मुख्यालय में प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार की अध्यक्षता में मानव-वन्य प्राणी संघर्ष की रोकथाम को लेकर अहम बैठक आयोजित की गई. बैठक में हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों में हाथियों द्वारा हुई जानलेवा घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई गई. प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने निर्देश दिया कि तकनीकी सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा आधारभूत संरचना को मजबूत कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.

12 दिनों के भीतर मुआवजा और 30 मिनट में रिस्पांस
प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने स्पष्ट निर्देश दिया कि हाथी या अन्य जंगली जानवरों के हमले, दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में हर हाल में 12 दिनों के भीतर मुआवजा भुगतान सुनिश्चित किया जाए और प्रयास हो कि 10 दिनों में ही भुगतान हो जाए. उन्होंने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों को जोन में बांटकर क्विक रिस्पांस टीम को सक्रिय रखा जाए ताकि घटना की सूचना मिलते ही 30 मिनट के भीतर टीम घटनास्थल पर पहुंचे. साथ ही ग्रामीणों की सहभागिता बढ़ाने, उन्हें जागरूक करने और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया.
समन्वय, कॉरिडोर संरक्षण और माइक्रो हैबिटेट विकास पर जोर
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी रवि रंजन ने सभी वन प्रमंडल पदाधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि हाथियों को एक प्रमंडल से दूसरे में खदेड़ने के बजाय शांतिपूर्वक नियंत्रित करने का प्रयास किया जाए और जरूरत पड़ने पर राज्य मुख्यालय से सहयोग लिया जाए. मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी एस आर नटेश ने साइलोज निर्माण, चेक डैम, घास के मैदानों के विकास और माइक्रो हैबिटेट तैयार करने पर बल दिया ताकि हाथियों को प्राकृतिक आवास में ही पर्याप्त संसाधन मिल सकें. अधिकारियों ने बताया कि राज्य में लगभग 680 हाथी हैं, जिनकी सुरक्षा के साथ-साथ मानव जीवन की रक्षा भी विभाग की जिम्मेदारी है. इसके लिए कॉरिडोर मैपिंग, ड्रोन, रेडियो कॉलर और अन्य आधुनिक उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा.

