Ranchi: झारखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक राजधानी रांची इन दिनों एक ऐसी वैचारिक और छात्र-क्रांति का केंद्र बन चुकी है, जिसकी गूंज अब देश की सीमाओं से पार महसूस की जा रही है. एक तरफ राज्य के युवा लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में हुए कथित महाघोटालों, धांधलियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरकर आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ मोरहाबादी स्थित ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम युवाओं के अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प की एक नई इबारत लिख रहा है. इस बीच, बुधवार को इस छात्र आंदोलन के गलियारे से एक ऐसा भावनात्मक, वैचारिक और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जिसने आंदोलन की दिशा और दशा दोनों को एक नया मोड़ दे दिया है. देश के जाने-माने शिक्षा सुधारक, पर्यावरणविद् और लद्दाख के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से रांची में अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो से सीधी बातचीत की. इस हाई-प्रोफाइल वर्चुअल संवाद ने न केवल आंदोलनरत छात्रों का हौसला सातवें आसमान पर पहुंचा दिया, बल्कि उस अनशन को भी एक नया आयाम दिया, जो अब तक अपने चरम पर पहुंचकर एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका था.
सुलगती राजधानी और जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम का रणक्षेत्र
झारखंड में पिछले कुछ वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं के नाम पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का जो सिलसिला चल रहा है, उसने अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले लिया है. JPSC की परीक्षाओं में पारदर्शिता का अभाव, JSSC-CGL के प्रश्नपत्र लीक मामले और चयन प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं ने राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं के सब्र का बांध तोड़ दिया है. इसी व्यवस्थागत अन्याय के खिलाफ मुखर आवाज उठाने वाले छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 25 जुलाई से सत्यग्रह का बिगुल फूंका था. आंदोलन जैसे-जैसे परवान चढ़ता गया, सरकार की ओर से कोई ठोस और संतोषजनक प्रतिक्रिया न मिलने पर देवेंद्र ने 2 अगस्त से अन्न और जल दोनों का पूरी तरह त्याग कर दिया था. पिछले कई दिनों से लगातार जारी इस आमरण अनशन के कारण उनकी शारीरिक स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी थी.डॉक्टरों की तमाम चेतावनियों के बावजूद वे अपनी जिद पर अड़े थे

देश सुन रहा है तुम्हारी पुकार
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के स्वास्थ्य में लगातार आ रही भारी गिरावट और उनकी बिगड़ती हालत की खबर जब देश के जाने-माने गांधीवादी विचारक सोनम वांगचुक तक पहुंची, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए वीडियो कॉल के जरिए रांची के आंदोलनरत युवाओं से सीधा संवाद स्थापित किया. स्क्रीन पर लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को देखकर अनशन स्थल पर मौजूद हजारों छात्रों का उत्साह देखने लायक था. सोनम वांगचुक ने सबसे पहले छात्रों के इस जज्बे और उनके ऐतिहासिक संघर्ष को दिल से सलाम किया. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि झारखंड के युवा जो लड़ाई लड़ रहे हैं, वह किसी व्यक्तिगत स्वार्थ या नौकरी की छोटी मांग के लिए नहीं है, बल्कि यह देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और एक पारदर्शी तंत्र की स्थापना की लड़ाई है. सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के दौरान कहा, हम आपके इस अदम्य जज्बे और कोशिशों को सलाम करते हैं. आपने कोई निजी मांग नहीं रखी है, बल्कि छात्रों के व्यापक हित और शिक्षा व्यवस्था में बुनियादी सुधार की बात उठाई है. आज पूरा देश और देश का हर जागरूक नागरिक आपकी इस आवाज को सुन रहा है. सरकार और प्रशासन को गहरी नींद से जागना चाहिए और छात्रों की इन जायज मांगों पर तुरंत गंभीरता से विचार कर उनका स्थायी समाधान निकालना चाहिए.

सत्याग्रह का उद्देश्य आत्महत्या नहीं, अंतरात्मा को जगाना है
बातचीत का दौर जैसे-जैसे आगे बढ़ा, सोनम वांगचुक ने एक बड़े अभिभावक और मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हुए देवेंद्र नाथ महतो के स्वास्थ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने समझाया कि सत्याग्रह और उपवास का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक गौरवशाली इतिहास रहा है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य अपने जीवन को खतरे में डालना या आत्महत्या करना कतई नहीं होता, बल्कि इसका उद्देश्य समाज और सत्ता में बैठे लोगों की सोई हुई अंतरात्मा को झकझोर कर जगाना होता है. महात्मा गांधी के उपवासों का उदाहरण देते हुए वांगचुक ने बेहद तार्किक और व्यावहारिक बात कही. उन्होंने कहा कि उपवास के कई तरीके और मार्ग होते हैं. महात्मा गांधी भी अपने ऐतिहासिक उपवासों के दौरान न्यूनतम आवश्यकता के अनुसार जल, नमक और नींबू का सेवन करते थे.
यदि आप बिल्कुल जल ग्रहण नहीं करेंगे, तो कुछ ही दिनों में आपका शरीर आपका साथ छोड़ देगा
वांगचुक ने देवेंद्र को समझाते हुए कहा, यदि आप बिल्कुल जल ग्रहण नहीं करेंगे, तो कुछ ही दिनों में आपका शरीर आपका साथ छोड़ देगा. हमारा मुख्य लक्ष्य अपनी आत्मा को जगाना और सरकार की अंतरात्मा को झकझोरना है, न कि अपने जीवन और स्वास्थ्य को गंभीर खतरे में डालना. इसलिए मैं आपसे बार-बार और एक बड़े भाई की तरह आग्रह करता हूं कि आप अनशन के दौरान कम से कम जल, नींबू, नमक और यदि संभव हो तो शहद-पानी का सेवन अवश्य करें. यह संघर्ष काफी लंबा चल सकता है और इसके लिए आपका जीवित और स्वस्थ रहना सबसे पहली शर्त है.
शरीर अब साथ नहीं दे रहा, पर न्याय चाहिए
सोनम वांगचुक के इस स्नेहिल और तार्किक आग्रह के जवाब में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी शारीरिक पीड़ा और मानसिक संघर्ष को साझा किया. भावुक होते हुए देवेंद्र ने बताया कि उनकी तबीयत पिछले कुछ दिनों से लगातार बेहद खराब चल रही है. शरीर में अत्यधिक कमजोरी आ चुकी है, सिर और बदन में तेज दर्द बना हुआ है और शरीर का कोई भी अंग अब उनका साथ नहीं दे रहा है. अपने आंसुओं और कंपकंपाती आवाज के बीच देवेंद्र ने कहा, मैं 25 जुलाई से इस सत्याग्रह पर बैठा हूं. पिछले कई दिनों से मैं ठीक से सो नहीं पाया हूं और 2 अगस्त से तो मैंने अन्न और जल दोनों का पूरी तरह त्याग कर दिया है. देवेंद्र ने यह भी बताया कि सोनम वांगचुक हमेशा से उनके सबसे बड़े राजनीतिक और वैचारिक आदर्श रहे हैं. उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर वांगचुक द्वारा किए गए आंदोलनों से प्रेरणा लेकर ही झारखंड में इस छात्र क्रांति का आगाज किया था. देवेंद्र ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कई स्थानीय डॉक्टरों ने उनके गिरते हुए ब्लड प्रेशर और खतरनाक रूप से नीचे जा रहे शुगर लेवल को लेकर गंभीर चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने अब तक किसी की भी एक बात नहीं मानी थी। क्योंकि उनके भीतर व्यवस्था के खिलाफ लड़ने की आग जल रही थी.
आपकी बात मानूंगा, जल ग्रहण करूंगा
देवेंद्र नाथ महतो की इस जिद और निष्ठा को देखते हुए सोनम वांगचुक ने एक बार फिर उन्हें पूरी दृढ़ता के साथ समझाया. वांगचुक ने कहा कि यदि वे उन्हें अपना आदर्श मानते हैं और उनके संघर्ष से प्रेरणा लेते हैं, तो उन्हें उनके इस एक आग्रह को जरूर मानना होगा और तुरंत जल ग्रहण करना होगा. वांगचुक ने आश्वासन देते हुए कहा, “यदि आप मुझे अपना आदर्श मानते हैं, तो मेरी इस एक बात को आज ही मानिए. जल ग्रहण कीजिए. यह न्याय की लंबी लड़ाई है और इसके लिए आपका स्वस्थ रहना अनिवार्य है. सरकार की बहरी और अंधी अंतरात्मा को जगाने के लिए आपका जिंदा रहना सबसे ज्यादा जरूरी है. मुझे पूरी उम्मीद है कि सरकार को आपकी इस ताकत के आगे झुकना ही होगा और वह जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय लेगी. देवेंद्र ने कहा कि यदि सोनम वांगचुक उनके इस आंदोलन के साथ मजबूती से खड़े रहने और भविष्य में भी उनका निरंतर मार्गदर्शन करते रहने का खुला वादा करते हैं, तभी वे जल ग्रहण करने पर विचार करेंगे. इस पर सोनम वांगचुक ने बिना किसी हिचकिचाहट के देवेंद्र को पूर्ण समर्थन का भरोसा दिया. उन्होंने कहा कि मैं पूरी तरह से आपके इस आंदोलन का समर्थन करता हूं और आगे भी आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहूंगा. समय-समय पर हम फोन या वीडियो कॉल के जरिए बात भी करते रहेंगे. आप पूरी तरह से शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और अनुशासित तरीके से अपना यह संघर्ष जारी रखिए. पूरा देश आपकी इस सही आवाज के साथ है और मैं व्यक्तिगत रूप से भी आपके हर कदम पर आपके साथ हूं.
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