फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से बदली जिंदगी, फूलमणि मुर्मू बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल

पाकुड़: जिले के महेशपुर प्रखंड के साहेबनगर गांव की रहने वाली फूलमणि मुर्मू आज आत्मनिर्भरता, सम्मान और सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल...

पाकुड़: जिले के महेशपुर प्रखंड के साहेबनगर गांव की रहने वाली फूलमणि मुर्मू आज आत्मनिर्भरता, सम्मान और सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं. उनका जीवन संघर्ष, साहस और सकारात्मक परिवर्तन की ऐसी कहानी है, जो यह साबित करती है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन की दिशा बदल सकता है.

आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली फूलमणि मुर्मू के परिवार में उनके पति और तीन बेटे हैं. उनके पति दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, लेकिन अनियमित रोजगार के कारण परिवार की आजीविका चलाना बेहद कठिन था. विपरीत परिस्थितियों में वर्ष 2021 से उन्होंने मजबूरीवश हड़िया बेचने का कार्य शुरू किया. इस कार्य से उन्हें प्रतिदिन लगभग 250 से 300 रुपये की आय होती थी, लेकिन सामाजिक सम्मान की कमी, अभद्र व्यवहार और असुरक्षित माहौल के कारण वे मानसिक रूप से परेशान रहती थीं और अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहती थीं.

वर्ष 2024 में उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई, जब वे झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “फूलो झानो आशीर्वाद अभियान” से जुड़ीं. झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के आर्थिक सहयोग और The/Nudge Institute के तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें दिसंबर 2024 में 25,000 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई. यह सहयोग उनके जीवन में परिवर्तन का आधार बना.

प्राप्त राशि का उपयोग करते हुए उन्होंने तीन बकरियां और एक सुअर खरीदा. अपनी मेहनत और लगन के बल पर आज उनके पास छह बकरियां और तीन सुअर हैं. इसके साथ ही उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की और अब तक लगभग 14 किलोग्राम उत्पादन कर बाजार में बिक्री की है. आगे बढ़ते हुए उन्होंने मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण प्राप्त कर इसे भी अपनी आजीविका का हिस्सा बना लिया है.

आज फूलमणि मुर्मू विभिन्न आजीविका गतिविधियों के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 7,000 से 8,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब वे सम्मानजनक जीवन जी रही हैं और समाज में उनकी पहचान एक आत्मनिर्भर एवं सशक्त महिला के रूप में स्थापित हो चुकी है.

इस उल्लेखनीय बदलाव में नव जीवन सखी सोनाली मुर्मू की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने उन्हें बीमा के प्रति जागरूक किया, प्रशिक्षण दिलाने में सहयोग किया तथा निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया.

फूलमणि मुर्मू का कहना है कि “फूलो झानो आशीर्वाद अभियान से जुड़ना मेरे जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ. अब मैं सम्मान के साथ जीवन जी रही हूं और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हूं”.

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