Patna: राजनीति के मंच पर अक्सर बेबाक और अलग अंदाज में नजर आने वाले तेज प्रताप यादव इस बार एक बिल्कुल नए रूप में दिखाई दिए. भोजपुरी रियलिटी शो ‘भोजपुरी बवाल’ के ताजा प्रोमो में उनकी बातों ने लोगों को चौंका दिया. मंच पर हंसी-मजाक चल रहा था, लेकिन बातचीत जैसे ही परिवार पर पहुंची, तेज प्रताप का चेहरा गंभीर हो गया. शो में पवन सिंह, आम्रपाली दुबे और निरहुआ जैसे बड़े भोजपुरी सितारे मौजूद थे, फिर भी दर्शकों की नजरें तेज प्रताप पर टिक गईं. होस्ट ने उनसे मां और पिता के बारे में पूछा तो उन्होंने बिना किसी राजनीतिक भाषा के सीधे दिल की बात कही. उनका कहना था कि मां से रिश्ता शब्दों में नहीं बताया जा सकता और पिता की छवि हर बेटे के जीवन में सबसे बड़ी प्रेरणा होती है.

“पिता जैसा बनना हर बेटे का सपना”
तेज प्रताप ने कहा कि लोग अक्सर उनमें लालू प्रसाद यादव की झलक देखते हैं और उन्हें यह सुनकर अच्छा लगता है. उन्होंने कहा कि कौन बेटा नहीं चाहेगा कि लोग उसे उसके पिता जैसा समझें. यह जवाब देते समय उनके चेहरे पर गर्व और अपनापन दोनों साफ दिखाई दे रहे थे.

घर से दूरी पर छलक उठा दर्द
बातचीत का सबसे भावुक पल तब आया जब उनसे पूछा गया कि घर से अलग रहने का एहसास उन्हें तकलीफ देता है या नहीं. कुछ क्षण चुप रहने के बाद उन्होंने कहा कि जिंदगी हमेशा मनमाफिक नहीं चलती. उन्होंने माना कि इंसान बहुत कुछ चाहता है, लेकिन अंत में वही होता है जो ऊपर वाला तय करता है.

गांव में नेता नहीं, घर का बेटा नजर आया
शो के दूसरे हिस्से में तेज प्रताप अपने गांव पहुंचे. वहां का दृश्य किसी राजनीतिक कार्यक्रम से ज्यादा पारिवारिक लग रहा था. गांव के लोग उन्हें देखने उमड़ पड़े. उन्होंने गांव की दिनचर्या में खुद को ढाल लिया—गाय का दूध निकाला, गन्ने का रस बनाया और लोगों के साथ बैठकर पान खाया. इस पूरे दृश्य में उनका सहज और ग्रामीण चेहरा सामने आया.
मुस्कान के पीछे छिपी कहानी
तेज प्रताप पूरे कार्यक्रम में कभी ठहाके लगाते दिखे तो कभी अचानक शांत हो गए. उनकी आंखों और शब्दों में ऐसा एहसास था जैसे भीतर बहुत कुछ दबा हो. शायद यही वजह है कि यह प्रोमो सिर्फ एक मनोरंजन शो का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि एक बेटे की निजी भावनाओं की झलक बन गया.
सोशल मीडिया पर मिल रही प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर भी दर्शक यही कह रहे हैं कि इस बार उन्होंने तेज प्रताप यादव को नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे बेटे के रूप में देखा जो अपने परिवार से गहराई से जुड़ा हुआ है और जिंदगी की कुछ तकलीफों को आज भी चुपचाप अपने भीतर संभाले हुए है.
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