विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एक गंभीर आपराधिक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अपने दो नाबालिग बेटों की हत्या की दोषी महिला की सजा को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने महिला की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा उसे दी गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराया है. झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और न्यायाधीश अरुण कुमार राय की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद तमाम परिस्थितियों साक्ष्यों और पुलिस की जांच रिपोर्ट का बारीकी से अवलोकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला, कि प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्य स्पष्ट रूप से महिला की इस अपराध में संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं.
अन्य व्यक्ति द्वारा इस अपराध को अंजाम देने की कोई संभावना नहीं
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने घटना से जुड़े साक्ष्यों की श्रृंखला को इस प्रकार जोड़ा है, कि आरोपी महिला के अलावा किसी अन्य व्यक्ति द्वारा इस अपराध को अंजाम देने की कोई संभावना नहीं बनती. इसके साथ ही अदालत ने 2021 में निचली अदालत द्वारा सुनाए गए सजा के फैसले के खिलाफ महिला द्वारा दायर अपील को पूरी तरह से खारिज कर दिया. यह दर्दनाक मामला आरोपी महिला के दो छोटे मासूम बेटों जिनकी उम्र क्रमशः चार वर्ष और दो वर्ष थी की हत्या से जुड़ा हुआ है.
सजा को रद्द करने की गुहार लगाई थी
निचली अदालत में चले मुकदमे के दौरान पेश किए गए सबूतों से यह बात सामने आई थी, कि दोनों बच्चों की हत्या के समय आरोपी महिला ही उनके साथ थी. 2021 में ट्रायल कोर्ट ने मामले की सुनवाई पूरी करते हुए महिला को अपने ही दो मासूम बच्चों की निर्मम हत्या का दोषी पाया था. निचली अदालत ने महिला को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई थी. ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए महिला ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और खुद को निर्दोष बताते हुए सजा को रद्द करने की गुहार लगाई थी. यह मामला जमशेदपुर जिले से जुड़ा हुआ है.
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