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सरायकेला : 8वीं बोर्ड परीक्षा से वंचित रह गये दर्जनभर छात्र, टेंगाडीह विद्यालय में घोर लापरवाही, कड़ी कार्रवाई की मांग

Saraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय,टेंगाडीह में शिक्षकों की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है. आरोप है...

Saraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय,टेंगाडीह में शिक्षकों की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है. आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन ने समय पर विद्यार्थियों का पंजीकरण नहीं कराया, जिसके कारण लगभग एक दर्जन छात्र-छात्रा इस वर्ष 8वीं बोर्ड परीक्षा से वंचित रह गए. झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने 2 मार्च को आयोजित होने वाली परीक्षा में शामिल होने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य किया था. लेकिन विद्यालय के शिक्षकों ने समय पर पंजीकरण के लिए आवेदन जमा नहीं किया. छात्रों का प्रवेश पत्र जारी नहीं हो सका जिससे ये छात्र परीक्षा से वंचित रह गये.

छात्रों और परिजनों में आक्रोश

जो छात्र परीक्षा नहीं दे पाये उनके नाम हैं- चित्रा सिंह, उत्तम सिंह, प्रतिमा सिंह, उर्मिला दास, जीतवाहन सिंह, चंपारानी सिंह, प्रियंका मुर्मू, वन बिहारी सिंह, सुशील हांसदा, शुभम मांझी और मनोज सिंह. परीक्षा से वंचित होने के कारण छात्रों एवं उनके अभिभावकों में गहरा आक्रोश है. अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालय में तीन सरकारी शिक्षक पदस्थापित होने के बावजूद इतनी बड़ी चूक अत्यंत चिंताजनक है. अभिभावक लखीराम सिंह ने बताया कि उनकी पुत्री प्रतिमा सिंह इस घटना से मानसिक रूप से आहत है.

शिक्षा विभाग ने प्रधानाध्यापक का वेतन रोका

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक सरसिज कुमार का वेतन अस्थायी रूप से रोकते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है. प्रधानाध्यापक ने इसे तकनीकी समस्या बताते हुए विभाग को अपना जवाब सौंप दिया है. वहीं, टेंगाडीह पंचायत के मुखिया अर्जुन सिंह ने शिक्षकों को शिक्षण कार्य पर विशेष ध्यान देने को कहा है.

मामले की निष्पक्ष जांच की मांग

स्थानीय संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है. सरना सरहुल समिति से जुड़े पंचायत सचिव दिगंबर सिंह सरदार ने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है.

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