JSSC-CGL परीक्षा रद्द: नियुक्ति पत्र मिलने के बाद नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थियों ने प्रोजेक्ट भवन में दिया धरना, न्याय की मांग

Ranchi: राज्य सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा को रद्द किए जाने के फैसले के बाद प्रभावित उम्मीदवारों का गुस्सा फूट पड़ा है. इस...

JSSC-CGL Exam Cancelled
JSSC-CGL Exam Cancelled

Ranchi: राज्य सरकार द्वारा JSSC-CGL परीक्षा को रद्द किए जाने के फैसले के बाद प्रभावित उम्मीदवारों का गुस्सा फूट पड़ा है. इस निर्णय से वे अभ्यर्थी सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं, जिन्हें नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया था और जो विभिन्न विभागों में अपने पदों पर कार्यभार संभाल चुके थे. मंगलवार को अपनी सेवा सुरक्षा, स्पष्टता और न्याय की मांग को लेकर सैकड़ों अभ्यर्थियों ने धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन (सचिवालय) के समक्ष जोरदार प्रदर्शन और धरना दिया.

क्या है पूरा मामला?

राज्य सरकार ने सोमवार की रात जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोपों के बाद पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करने की घोषणा की है. सरकार के इस कदम से उन अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है, जो पारदर्शी चयन प्रक्रिया के तहत चयनित होकर पिछले कुछ समय से नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे थे. रद्द करने के आदेश के साथ ही इन कर्मियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त मानी जा रही हैं, जिससे उनके समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो गया है.

नियुक्ति बहाल करने की मांग

अभ्यर्थियों का कहना है कि जिन्होंने अपनी मेहनत से परीक्षा पास की और महीनों तक ईमानदारी से कार्य किया, उन्हें किसी अन्य की गलती की सजा नहीं मिलनी चाहिए. प्रदर्शनकारियों ने मांग रखी है कि सरकार जांच एजेंसी के जरिए केवल दोषी पाए गए लोगों पर कार्रवाई करे, न कि पूरी परीक्षा को रद्द कर निर्दोष कर्मियों का रोजगार छीने. प्रोजेक्ट भवन पर डटे अभ्यर्थियों ने मांग की कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक उनके पदों को सुरक्षित रखते हुए उनकी सेवा निरंतरता बनाए रखी जाए.

प्रोजेक्ट भवन के बाहर सुरक्षा सख्त

सचिवालय के मुख्य द्वार पर अभ्यर्थियों के जमावड़े को देखते हुए रांची पुलिस और प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया. अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपने का काम करेंगे. पीड़ित अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि यदि सरकार जल्द ही उनकी सेवा सुरक्षा को लेकर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती या स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं करती है, तो वे बाध्य होकर आंदोलन को और तीव्र करेंगे.

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