Ranchi: झारखंड की सियासत और व्यवस्था के दामन पर लगा सबसे बड़ा बदनुमा दाग सीजीएल बन गया. साल 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में जिस परीक्षा का बीज बोया गया था, वह आज तक सिस्टम की लालफीताशाही, अदालती पेंच, पेपर लीक और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी का ऐसा शिकार रही है कि झारखंड के युवाओं के लिए यह परीक्षा गले की हड्डी बन गई. तीन अलग-अलग सरकारें आईं, मुख्यमंत्रियों के चेहरे बदले, लेकिन नहीं बदली तो सिर्फ युवाओं की किस्मत.

2015: रघुवर राज और विवादों की नींव
झारखंड में सीजीएल परीक्षा की शुरुआत साल 2015 में रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में हुई. जेएसएससी ने जब पहली बार इस परीक्षा का विज्ञापन निकाला, तो युवाओं में एक उम्मीद जगी थी कि उन्हें रोजगार मिलेगा. लेकिन यह उम्मीद जल्द ही प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गई. विज्ञापन में नियमों और योग्यताओं से जुड़ी ऐसी कई गंभीर त्रुटियां थीं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था. नतीजतन, मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया और अदालत ने इस पहली ही कोशिश को सिरे से खारिज कर दिया.
2019 और 2021: नियोजन नीति के फेर में फंसी उम्मीदें
रघुवर सरकार के झटके के बाद, साल 2019 में आयोग ने एक बार फिर नए सिरे से विज्ञापन जारी किया. इस बार नया विवाद स्थानीयता और भाषा को लेकर था. विज्ञापन में झारखंड से ही मैट्रिक और इंटर पास करने की अनिवार्यता जैसी शर्तें जोड़ दी गईं, जिसके चलते इस प्रक्रिया पर फिर से कानूनी रोक लग गई. महागठबंधन की पहली सरकार सत्ता में आई। साल 2021 में एक बार फिर नए सिरे से सीजीएल का विज्ञापन निकाला गया. लेकिन एक बार फिर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की नियोजन नीति को ही रद्द कर दिया. अदालती चाबुक एक बार फिर जेएसएससी और सरकार की कार्यप्रणाली पर चला और परीक्षा फिर से ठंडे बस्ते में चली गई.
2023-24: पेपर लीक का काला साया
जून 2023 में जेएसएससी ने एक बार फिर विज्ञापन निकाला। परीक्षा की तारीखें तय हुईं. पहले अक्टूबर 2023, फिर दिसंबर 2023. लेकिन परीक्षा कराने वाली एजेंसी ने ही अचानक अपने हाथ खड़े कर दिए, जिससे परीक्षा टलती चली गई. आखिरकार, तारीख आई 28 जनवरी और 4 फरवरी 2024. 28 जनवरी को जैसे ही परीक्षार्थी परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे, उससे ठीक पहले प्रश्नपत्र लीक होने की खबर आग की तरह फैल गई. आक्रोशित छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। जेएसएससी कार्यालय से लेकर राजधानी रांची की सड़कों तक युवाओं का जनसैलाब उमड़ पड़ाय छात्रों के उग्र प्रदर्शन के आगे तत्कालीन जेएसएससी अध्यक्ष नीरज सिन्हा को इस्तीफा देना पड़ा.एसआईटी जांच के आदेश दिए गए और परीक्षा रद्द करनी पड़ी.
सितंबर 2024: इंटरनेट बंद, फुलप्रूफ दावों के बीच फिर से परीक्षा
छात्रों के भारी आक्रोश और विरोध के बाद, सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच 21 और 22 सितंबर 2024 को दोबारा सीजीएल परीक्षा आयोजित की. जिसमें पेपर लीक रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं तक बंद कर दी गईं और फुलप्रूफ व्यवस्था की गई. इस बार करीब 6.50 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. परीक्षा संपन्न हुई. इस बार भी पेपर लीक के सुगबुगाहट और विवादों के साये ने पीछा नहीं छोड़ा. छात्र फिर से आंदोलन की राह पर चल पड़े.
30 दिसंबर 2025: मोरहाबादी मैदान में मिली औपबंधिक राहत
एक बार फिर महागठबंधन की सरकार सत्ता में लौटी. नई सरकार ने इन विवादों के बीच फंसे सफल अभ्यर्थियों को जल्द से जल्द नियुक्ति देने की इच्छाशक्ति दिखाई. मामला पहले से ही न्यायालय में लंबित था, जहां सरकार ने सीआईडी और एसआईटी जांच के निष्कर्षों का हवाला दिया. लंबे संघर्ष और अदालती जद्दोजहद के बाद आखिरकार झारखंड हाईकोर्ट से इस परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों को कंडीशनल आधार पर औपबंधिक नियुक्ति देने की हरी झंडी मिल गई. 30 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हाथों रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में करीब 2,000 सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए.
किस पद पर कितने युवा हुए सलेक्ट
• सहायक प्रशाखा पदाधिकारी: 863 पद
• कनीय सचिवालय सहायक: 335 पद
• श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी: 182 पद
• प्लानिंग असिस्टेंट: 05 पद
• प्रखंड कल्याण पदाधिकारी: 195 पद
• प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी: 252 पद
• अंचल निरीक्षक: 185 पद
• कनीय सचिवालय सहायक (बैकलॉग): 08 पद
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