चाईबासा: खुशियां जब दरवाजे पर दस्तक देती हैं, तो पूरे गांव का माहौल बदल जाता है. कुछ ऐसा ही नजारा जिले के सोनुआ थाना क्षेत्र स्थित हाड़ीमारा गांव में मंगलवार को देखने को मिला. 12 साल पहले जो बच्चा महज 4–5 साल की उम्र में खेल-खेल में ट्रेन पकड़कर लापता हो गया था, आज वह एक पेशेवर फुटबॉल खिलाड़ी बनकर अपने घर लौटा है.

कैसे बिछड़ा था मासूम गोमा
करीब 12 साल पहले, बोडराम उर्फ बुधराम गोप का नन्हा बेटा राजा गोप उर्फ गोमा भटकते हुए रेलवे स्टेशन पहुंच गया था. अनजाने में वह एक ट्रेन में सवार हो गया, जो उसे झारखंड से हजारों किलोमीटर दूर केरल ले गई. घरवाले सालों तक उसकी तलाश करते रहे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. धीरे-धीरे उम्मीदें धुंधली पड़ने लगी थीं, मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था.
केरल में मिली नई पहचान, फुटबॉल बना सहारा
केरल पहुंचने के बाद राजा कुन्नूर की चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के संरक्षण में आ गया. वहां एक अनाथालय में उसकी परवरिश हुई. इसी दौरान राजा के भीतर के खिलाड़ी ने जन्म लिया. वह वहां के स्थानीय क्लबों के लिए फुटबॉल खेलने लगा और देखते ही देखते एक बेहतरीन फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में उभरा. आज वह केरल के एक प्रतिष्ठित क्लब का हिस्सा है.
चाईबासा पुलिस की मानवीय मुहिम
इस मिलन की कहानी तब शुरू हुई, जब राजा ने अपनी धुंधली यादों के आधार पर चाईबासा का जिक्र किया. केरल CWC ने तुरंत चाईबासा पुलिस से संपर्क साधा. पुलिस ने राजा की तस्वीर और जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की. सोनुआ पुलिस हाड़ीमारा गांव पहुंची, जहां परिजनों ने राजा को पहचान लिया. कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस टीम राजा को सुरक्षित लेकर चाईबासा पहुंची.
गांव में जश्न, मां की आंखों में छलके आंसू
जैसे ही राजा ने अपने गांव की दहलीज पर कदम रखा, पूरा गांव बाजे-गाजे और ढोल-नगाड़ों की थाप पर थिरक उठा. 12 साल बाद अपने कलेजे के टुकड़े को सामने देखकर मां की आंखों से खुशी के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे. ग्रामीणों ने राजा का स्वागत एक नायक की तरह किया.
आगे क्या? राजा का सपना है बड़ा
दिलचस्प बात यह है कि राजा अपनी जड़ों से तो जुड़ गया है, लेकिन उसने अपने सपनों को नहीं छोड़ा है. उसने इच्छा जताई है कि वह वापस केरल जाकर अपने फुटबॉल करियर को आगे बढ़ाना चाहता है. परिवार ने भी उसकी प्रतिभा और इच्छा का सम्मान करने का फैसला किया है.

