रांची: झारखंड में सरकारी विभागों के बीच लंबित मुकदमों के बोझ को कम करने और जनता को त्वरित न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार ने ‘Mediation for the Nation 2.0’ अभियान को लेकर तैयारी शुरू कर दी है. विधि विभाग के प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी, नीरज कुमार श्रीवास्तव ने राज्य के सभी अधिकारियों को पत्र लिखकर इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं.
मुख्य सचिव की बैठक में लिया गया निर्णय:
हाल ही में 24 फरवरी को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई थी. इस बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार के विभिन्न विभागों में लंबित वैसे मामले, जिन्हें आपसी सहमति या मध्यस्थता से सुलझाया जा सकता है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाए.
विभागों को मिले ये प्रमुख निर्देश:
विधि विभाग द्वारा जारी पत्र में सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, विभागाध्यक्षों और डीजीपी सहित सभी जिलों के डीसी को कहा गया है कि प्रत्येक विभाग को तत्काल प्रभाव से एक नोडल पदाधिकारी नामित करना होगा जो मध्यस्थता की प्रक्रिया की देखरेख करेंगे. विभागों को अपने यहां लंबित ऐसे वादों और मामलों की सूची तैयार करनी होगी जिन्हें झालसा (झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार) के माध्यम से मध्यस्थता के लिए भेजा जा सकता है. चिन्हित किए गए मामलों की सूची और नामित नोडल पदाधिकारी का विवरण सीधे सदस्य सचिव, झालसा को भेजने का निर्देश दिया गया है.
क्या है Mediation for the Nation 2.0′ अभियान?:
यह Mediation and Conciliation Project Committee (MCPC) द्वारा चलाया जा रहा एक राष्ट्रव्यापी अभियान है. इसका मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या को कम करना और मध्यस्थता के जरिए विवादों का समाधान निकालना है.
