पलामू: पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला स्थित सभागार में ‘नेचर एंड मीडिया’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण में मीडिया की भूमिका को रेखांकित करना और रिपोर्टिंग के नैतिक पहलुओं पर चर्चा करना था. कार्यशाला में पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया और प्रकृति संरक्षण के लिए अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया.

रिपोर्टिंग में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर जोर
कार्यशाला के दौरान वन्यजीव विशेषज्ञों ने कहा कि जंगल और वन्यजीवों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग में संवेदनशीलता और नैतिकता बेहद जरूरी है. खासकर मानव और वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में खबरों को जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करना चाहिए. विशेषज्ञों ने बताया कि गलत या अधूरी जानकारी से क्षेत्र में भय का माहौल बन सकता है और इससे वन्यजीवों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है. इस दौरान वनकर्मियों द्वारा वन्यजीव अपराध रोकने और जंगलों की सुरक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी मीडिया प्रतिनिधियों को दी गई.
संवाद, सुरक्षा और संरक्षण पर रही चर्चा
कार्यशाला में संवाद, सुरक्षा और संरक्षण जैसे तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष चर्चा की गई. अधिकारियों ने कहा कि जब जंगली जानवर रिहायशी इलाकों में पहुंचते हैं तो मीडिया की भूमिका सिर्फ सनसनी फैलाने की नहीं बल्कि समाधान की दिशा में जागरूकता बढ़ाने की होनी चाहिए. वन्यजीव अपराधों को रोकने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए मीडिया और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई गई. कार्यक्रम के अंत में यह निष्कर्ष निकला कि मीडिया यदि जिम्मेदारी के साथ प्रकृति और वन्यजीवों से जुड़ी सही जानकारी समाज तक पहुंचाए तो संरक्षण के प्रयासों को नई गति मिल सकती है.

