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गिरिडीह: थैलेसीमिया से जूझ रहे 4 साल के मासूम के लिए मदद की गुहार, विधायक कल्पना सोरेन से मिला परिवार

गिरिडीह: जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र अंतर्गत करमाटांड़, पंचायत जीतपुर निवासी एक गरीब परिवार इन दिनों बेहद कठिन हालात से गुजर रहा...

गिरिडीह: जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र अंतर्गत करमाटांड़, पंचायत जीतपुर निवासी एक गरीब परिवार इन दिनों बेहद कठिन हालात से गुजर रहा है. परिवार का 4 वर्षीय मासूम बेटा जन्म से ही थैलेसीमिया जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी से पीड़ित है. इस बीमारी के कारण बच्चे के शरीर में खून की कमी लगातार बनी रहती है, जिससे उसकी जान बचाने के लिए हर कुछ समय पर खून चढ़ाना अनिवार्य हो जाता है.

आर्थिक संकट से जूझता परिवार

परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है. मासूम के पिता दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च चलाते हैं, लेकिन बेटे के इलाज का लगातार बढ़ता खर्च अब उनके लिए असहनीय होता जा रहा है. दवाइयों, जांच और बार-बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन के कारण परिवार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है. परिजनों ने बेहतर इलाज की उम्मीद में रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) समेत कई बड़े अस्पतालों का रुख किया, लेकिन अब तक बच्चे की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो सका है.

विधायक से लगाई गुहार

सोमवार को गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन के गिरिडीह आगमन पर पीड़ित परिवार उनसे मिलने पहुंचा. इस दौरान परिवार ने विधायक के सामने अपनी पूरी व्यथा रखी. पिता की आंखों में बेबसी साफ झलक रही थी, वहीं मां अपने बच्चे को गोद में लेकर हर किसी से मदद की उम्मीद लगाए बैठी थी. परिजनों ने विधायक से बच्चे के समुचित इलाज, नियमित ब्लड की उपलब्धता और सरकारी सहायता दिलाने की गुहार लगाई.

मंत्री को भी बताई समस्या

इस दौरान मौके पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू भी मौजूद थे. परिवार ने उन्हें भी अपनी समस्या से अवगत कराया. परिजनों का कहना है कि सदर अस्पताल गिरिडीह में थैलेसीमिया मरीजों को मुफ्त ब्लड देने की व्यवस्था है, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. कई बार अस्पताल का चक्कर लगाने के बावजूद समय पर खून नहीं मिलने से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है.

हर दिन बढ़ रही चिंता

मासूम की हालत दिन-ब-दिन कमजोर होती जा रही है, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है. बच्चे की हर सांस अब खून की उपलब्धता पर निर्भर हो चुकी है. मां-बाप के लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक है, जहां वे अपने ही बच्चे को बचाने के लिए हर दिन संघर्ष कर रहे हैं.

व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला न सिर्फ एक परिवार की पीड़ा को उजागर करता है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को भी सामने लाता है. जरूरतमंदों के लिए बनी योजनाएं यदि सही तरीके से लागू नहीं हों, तो उनका लाभ लोगों तक नहीं पहुंच पाता.

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