Ranchi: झारखंड में बढ़ते अपराध और हाल के दिनों में त्योहारों के दौरान हुई पत्थरबाजी की घटनाओं को लेकर प्रदेश भाजपा ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. मंगलवार को भाजपा के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा से मुलाकात कर राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था और तुष्टीकरण की राजनीति के खिलाफ ज्ञापन सौंपा. भाजपा ने आरोप लगाया है कि वर्तमान सरकार अपनी सोची-समझी रणनीति के तहत एक विशेष समुदाय को संरक्षण दे रही है, जिससे राज्य में बहुसंख्यक समाज के बीच भय का माहौल व्याप्त है.
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6 वर्षों से तुष्टीकरण की आग में जल रहा झारखंड
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने डीजीपी को अवगत कराया कि पिछले 6 वर्षों से झारखंड तुष्टीकरण जनित अपराधों की चपेट में है. पार्टी का कहना है कि सरकार की फूट डालो और राज करो की नीति के कारण अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक समाज के बीच खाई गहरी होती जा रही है. ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि जब पुलिस प्रशासन निष्पक्षता छोड़कर सरकार के राजनीतिक एजेंडे का ‘टूलकिट’ बन जाता है, तो जनता का कानून से विश्वास उठ जाता है. भाजपा ने राज्य के विभिन्न जिलों में हुई हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि सनातन समाज के उत्सव अब निशाने पर हैं.
मुरहू की घटना पर पुलिस की कार्रवाई को बताया भेदभावपूर्ण
प्रतिनिधिमंडल ने 31 मार्च को खूंटी के मुरहू का दौरा करने के बाद दावा किया कि वहां की पुलिस कार्रवाई पूरी तरह एकपक्षीय है. भाजपा के अनुसार, पुलिस ने असली दंगाइयों को पकड़ने के बजाय पीड़ित हिंदू समाज के 77 निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. पार्टी ने मांग की है कि इन निर्दोषों को तुरंत रिहा किया जाए और नामजद अपराधियों पर सख्त कार्रवाई हो.

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क्या हैं मांगें?
• त्योहारों पर सुरक्षा: सनातन समाज के पर्व-त्योहारों में बाधा डालने और पत्थरबाजी करने वालों पर पूर्ण लगाम लगे.
• गौ-तस्करी पर रोक: राज्य में बड़े पैमाने पर हो रही गौ-तस्करी और प्रतिबंधित मांस की बिक्री पर तत्काल कार्रवाई हो.
• निर्दोषों की रिहाई: खूंटी मामले में गिरफ्तार 77 निर्दोष लोगों को अविलंब छोड़ा जाए.
• प्रशासनिक निष्पक्षता: पुलिस प्रशासन सरकार का टूलकिट बनने के बजाय अपनी वर्दी की गरिमा बहाल करे और अपराधियों को संरक्षण देना बंद करे.
