Bokaro: विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) के अवसर पर भारत की समृद्ध जनजातीय कला और संस्कृति को एक नया वैश्विक आयाम देते हुए डीवीसी सिविल के वरीय प्रबंधक एवं प्रसिद्ध मधुबनी चित्रकार शिशु मोहन की धर्मपत्नी, दंत चिकित्सक डॉ छाया कुमारी ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने कपड़े पर मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित 104 फीट लंबी और 7.5 फीट चौड़ी एक विशालकाय गोंड पेंटिंग का निर्माण किया है.यह भव्य कलाकृति गोंड समाज के पारंपरिक जीवन, जीवंत वनस्पति, पशु-पक्षियों, घरेलू गतिविधियों, लोक उत्सवों और पारंपरिक प्रतीकों को एक ही विशाल कैनवास में बखूबी जीवंत करती है.

ऐतिहासिक कृति के दस्तावेजीकरण है बेहद अनूठा
डॉ छाया की इस कलात्मक साधना को ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ और ‘एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ दोनों में आधिकारिक तौर पर दर्ज और पंजीकृत किया गया है. इस ऐतिहासिक कृति के दस्तावेजीकरण (रिकॉर्डिंग) के दौरान एक बेहद अनूठा और रोमांचक दृश्य देखने को मिला. बारिश का मौसम होने और जमीन पूरी तरह गीली होने के कारण 104 फीट लंबी इस पेंटिंग को फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी के लिए अपार्टमेंट की 9वीं मंजिल से नीचे ग्राउंड फ्लोर तक फहराया गया. 9वीं मंजिल से नीचे लटकती इस विशाल कलाकृति का विहंगम दृश्य हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देने वाला था.
कई अन्य उत्कृष्ट जनजातीय कलाकृतियों भी करेंगी प्रदर्शित
विश्व आदिवासी दिवस तक डॉ छाया अपनी कई अन्य उत्कृष्ट जनजातीय कलाकृतियों को प्रदर्शित करेंगी, जिसका उद्देश्य भारत की स्वदेशी कला रूपों की सुंदरता, परंपरा और कालातीत विरासत का उत्सव मनाना है.उनकी यह उपलब्धि न केवल कला जगत के लिए एक मील का पत्थर है, बल्कि भारतीय आदिवासी धरोहर का एक गौरवशाली दस्तावेज भी बन गई है.
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