बजट सत्र 2025: महिला, जल, आदिवासी और पर्यटन क्षेत्र में झारखंड की बदली तस्वीर

रांची: बजट सत्र के दौरान प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025 में झारखंड के सामाजिक और आर्थिक विकास की विस्तृत तस्वीर सामने आई है....

रांची: बजट सत्र के दौरान प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025 में झारखंड के सामाजिक और आर्थिक विकास की विस्तृत तस्वीर सामने आई है. महिला एवं बाल विकास, जल–स्वच्छता, आदिवासी कल्याण, प्राकृतिक संसाधन और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में राज्य ने प्रगति दर्ज की है, वहीं कई अहम चुनौतियाँ अब भी मौजूद हैं. रिपोर्ट बताती है कि विकास की रफ्तार बनी हुई है, लेकिन इसे संतुलित और समावेशी बनाना अभी भी प्राथमिकता है.

महिला एवं बाल विकास: सुधार के संकेत, चुनौतियाँ कायम

राज्य में मातृ स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव दिखे हैं. संस्थागत प्रसव और महिला साक्षरता में बढ़ोतरी से स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार का संकेत मिलता है.

प्रमुख उपलब्धियां:

  • मातृ मृत्यु दर घटकर 54 प्रति 1 लाख जीवित जन्म

  • शिशु मृत्यु दर 25 प्रति 1,000 जीवित जन्म

  • महिला साक्षरता 72.6%

  • 85.7% संस्थागत प्रसव

  • 2025-26 में 8,456 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान

हालांकि सामाजिक चुनौतियाँ अभी भी गंभीर हैं. बाल विवाह और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दे राज्य के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं.

मुख्य चुनौतियां:

  • बाल विवाह दर 32.2%

  • 32% विवाहित महिलाएं घरेलू हिंसा से प्रभावित

  • ICDS में 2,503 पद रिक्त

  • PMMVY योजना में तीसरी किस्त तक 25.8% गिरावट

जल एवं स्वच्छता: आधारभूत ढांचा मजबूत, लेकिन अंतर बाकी

जल और स्वच्छता क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है. अपशिष्ट प्रबंधन और कचरा निस्तारण में राज्य ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.

उपलब्धियां:

  • 112 अपशिष्ट प्रसंस्करण संयंत्र

  • 31 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में 41.94% का उपचार

  • 76 मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी

  • 22 कंपोस्टिंग प्लांट

फिर भी कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में जलापूर्ति और स्वच्छता को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं.

चुनौतियां:

  • 12 जिलों में नल जल कनेक्शन 90% से कम

  • 122 गांवों में पाइप जलापूर्ति नहीं

  • शौचालय पहुंच और उपयोग में 14% का अंतर

  • जल स्रोतों में 8.4% लौह संदूषण

आदिवासी कल्याण: शिक्षा और सशक्तिकरण पर फोकस

झारखंड की बड़ी आबादी अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित है। शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से इस वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिशें की गई हैं.

सकारात्मक प्रगति:

  • जनजातीय साक्षरता 66-68%

  • माध्यमिक स्तर पर लैंगिक समानता सूचकांक 1.02

  • 18.69 लाख आवेदन ई-कल्याण पोर्टल से सत्यापित

  • 9 लाख लड़कियां योजनाओं से लाभान्वित

इसके बावजूद शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में कई अंतराल मौजूद हैं.

प्रमुख चुनौतियां:

  • 50,000 से अधिक शिक्षक पद रिक्त

  • 75.8% गांव बहुआयामी गरीबी से प्रभावित

  • कई आवासीय विद्यालय अब भी गैर-कार्यात्मक

प्राकृतिक संसाधन: सतत विकास की दिशा

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और उपयोग के क्षेत्र में भी राज्य ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। वन आवरण और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि दर्ज की गई है.

मुख्य उपलब्धियां:

  • वन आवरण 34.38%

  • नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 186 मेगावाट

  • 34 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन

लेकिन भूजल संरक्षण और खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता बनी हुई है.

चुनौतियां:

  • कुछ क्षेत्रों में भूजल का अत्यधिक दोहन

  • खनिज संसाधनों में मूल्य संवर्धन की कमी

  • वन संरक्षण को निरंतर बनाए रखने की जरूरत

पर्यटन: घरेलू बढ़ोतरी, विदेशी गिरावट

पर्यटन क्षेत्र में घरेलू पर्यटकों की संख्या में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है.

उपलब्धियां:

  • 2024 में 540.41 लाख घरेलू पर्यटक

  • पर्यटन का जीएसडीपी में 6.3% योगदान

  • 51% वार्षिक वृद्धि

हालांकि विदेशी पर्यटकों की संख्या में गिरावट चिंता का विषय है.

मुख्य चुनौतियां:

  • विदेशी पर्यटकों में 76% गिरावट

  • सीमित होटल और आतिथ्य क्षमता

आर्थिक सर्वेक्षण 2025 स्पष्ट करता है कि झारखंड कई क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, जल प्रबंधन और पर्यटन में प्रगति के बावजूद सामाजिक सुधार और आधारभूत संरचना को और मजबूत करने की जरूरत है. आने वाले वर्षों में लक्षित नीतियां और प्रभावी क्रियान्वयन ही विकास की इस रफ्तार को स्थायी बना पाएंगे.

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