रांची: बजट सत्र के आठवें दिन ग्रामीण विकास विभाग के बजट के कटौती प्रस्ताव के पक्ष में बोलते हुए डॉ. नीरा यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता धरातल पर नहीं दिखती है. उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने के कारण केंद्र से अनुदान नहीं मिलता है. काफी कम प्रतिशत में राशि खर्च हो रही है. किन-किन विभागों का कितना बकाया है, हमलोग इन सभी बातों को केंद्र के पास रखेंगे. राज्यहित में पैसा लेकर आएंगे. इस पर योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि पेयजल का 6,207 करोड़ रुपए बकाया है.

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सदन में असत्य बात रखना उचित नहीं है. ग्रामीण विकास विभाग के पदाधिकारियों के प्रयास से पहली किस्त की राशि मिली है. इसमें विपक्ष की कोई भूमिका नहीं है. नीरा यादव ने कहा कि राज्य में प्रति व्यक्ति आय कम है.
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आखिरी समय में भी राम नाम सत्य आता है
नीरा यादव ने कहा कि आखिरी समय में भी राम नाम सत्य कहा जाता है. महात्मा गांधी की समाधि पर भी “हे राम” लिखा हुआ है. जो राम का नाम न ले, वह किसी काम का नहीं होता. डीएमएफटी फंड के नियमों के विपरीत बाहरी योजनाओं का चयन हो रहा है.
मरकच्चो, डोमचांच और चंदवारा के जंगलों में बाहरी लोगों को बसाया जा रहा है. विशेष समुदाय के लोग इसमें सहयोग कर रहे हैं. 50 से अधिक गांवों में बसाव हो चुका है. वन पट्टा भी दिया जा रहा है. इस पर अंकुश लगाया जाए.
दो तरह के अफसर हैं, एक घूसखोर तो दूसरा अतिघूसखोर: प्रदीप प्रसाद
प्रदीप प्रसाद ने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग की आधी राशि भी खर्च नहीं हुई है. पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके आप्त सचिव और वीरेंद्र राम का ही विकास हुआ है.
यहां दो तरह के अधिकारी हैं, एक घूसखोर और दूसरा अतिघूसखोर. सदन में गोलमोल जवाब दिया जाता है. उन्होंने मंत्री से कहा कि आप काम करें और नाम कमाएं. एक साल से विधायकों को कोई भी योजना नहीं मिली है.

